Thursday, 10 January 2019

किताबो के बाजार में...!!!

मैं आज फिर पहुँची,
किताबो के बाजार में,
हर किताब में मैंने गौर से निहारा,
हर अक्षर को छू कर देखा..
कि कोई पंक्ति रच कर,
तुमने मेरे लिए किसी किताब में रख दी होगी..
मैं ढूंढ लूं,वो चिट्ठियां जो तुमने लिखी तो होगी,
पर मुझे भेजी नही होगी...
हाँ मुझे याद है तुमने कहा था,
इक दिन कि जब मैं तुम्हे कही ना मिलूं,
तो तुम मुझे किसी पुस्तक मेले में,
किसी किताब में..
किसी पंक्ति में ढूंढ लेना,मैं मिल जाऊंगा..
अक्षरों को छू कर महसूस कर लेना,
मेरे दिल का हाल..
यही सोच हर बार,
मैं आती हूँ पुस्तक मेले में,
ढूंढती हूँ तुम्हे हर किताब में,
हर अक्षर में..
तुम तो मुझे कही नही मिलते,
पर हाँ तुम्हारा रचना रचने का अंदाज़,
जिन पंक्तियों में महसूस कर पाती हूँ,
मैं वो सारी किताबे ले आती हूँ,
ये सोच कर शायद तुम होते तो ,
तुम भी उन्हें ही पढ़ते..
ले जाते अपने साथ...
छोड़ आती हर किताब में,
अपनी उंगलियों की छुअन,
कि शायद तुम भी मुझे ढूंढते हुए,
कभी यही आ जाओ....!!!

Monday, 7 January 2019

किताबो के बीच, तुम्हे ढूंढती हूँ...!!!

मैं कभी बिखेर किताबो के बीच,
तुम्हे ढूंढती हूँ,
बस यूं ही....
शायद तुम मुझे मिल जाओ,
किसी पंक्ति में,किसी शब्द में...
पर ऐसा होता नही है..
मैं पहरों किताबो को निहारती हूँ,
तुम्हे वहां ना पा कर वापस,
उन्हें सहज कर रख देती हूं...
इस उम्मीद में तुम कभी तो मिल जाओगे,
यही कही किताबो में..
मैं तुम्हे पा ही लुंगी यूँ ही शब्दों में..
निहार लुंगी तुम्हे जी भर,
मन भर कर पढ़ लूंगी तुम्हे..!!!

Wednesday, 26 December 2018

सुनो दिसम्बर..जरा ठहरो..!!!

सुनो दिसम्बर..जरा ठहरो..
धीरे-धीरे गुजरो...
समेट तो लूं बिखरी हुई यादो को,
दर्ज तो कर लूँ दिल में कुछ तारीखों को,
जिनके साथ का वक़्त कभी गुजरा नही...
बांध कर रख लूं...
उन्हें नजरो से जो छोड़ कर चले गए,
थाम लूं उन हाथो को,
जो बिछड़े तो है पर छूटे नही है...
सुनो दिसम्बर..जरा ठहरो..
जी तो लूँ उन लम्हो को,
जो ठहरें तो है पर अभी गुजरे नही है...!!!

Monday, 10 December 2018

तुम कोई कमिटमेंट नही करना चाहते हो...!!!

मैं जानती हूं कि तुम कभी नही कहोगे की,
मैं तुम्हारे लिए जरूरी हूँ...
मैं तुम्हारे साथ चलूँ हर राह पर,
ऐसा तुम चाहते हो..
पर खुद आगे बढ़कर,
मुझे साथ चलने को नही कहोगे...
तुम नही कहोगे कि तुम बेचैन हो जाते हो,
मुझे अपने आस-पास ना पाकर..
मैं जानती हूं,तुम अपने प्रति लापरवाह हो जाते हो,
क्यों कि तुम जानते हो कि,
तुम्हारी परवाह करने के लिए मैं हूँ...
मैं जानती हूं,कि तुम कभी मुझे..
रुकने के लिए नही कहोगे,
पर जब तक मैं लौट कर ना आ जाऊं,
तुम वही ठहरे रहोगे...
तुम कभी अपने एहसासों को,
मुझसे नही कहोगे,
तुम भी महसूस करते हो,
मुझे हर लम्हा..पर कभी कहोगे नही..
क्यों कि तुम पुरुष हो,
ना पत्थर बने रहना चाहते हो..
तुम कुछ भी ना कहो,
पर मैं तुम्हारी हर बात समझजाऊं,
दिल से तो तुम ये चाहते हो,
पर तुम्हारे पास दिल है..
नही ये जताना चाहते हो...
तुम शामिल तो मुझे अपने हर लम्हे में चाहते हो,
पर मेरे लिए तुम्हारे पास कोई लम्हा नही है,
ये भी जताते हो...
तुम वो सब कुछ चाहते हो,जो मैं चाहती हूं...,
पर तुम डरते हो किसी भी जिम्मेदारी लेने से,
भागते हो अपने आप से,अपनी ख्वाइशों से....
तुम्हारा अहम तुम्हे रोकता है...
क्यों कि  तुम कोई कमिटमेंट नही करना चाहते हो...!!!

Saturday, 3 November 2018

अपनी queen मान लोगे..!!!

"If you make me a queen,
you will definitely a king..
सिर्फ इस एक लाइन को जीना चाहती है एक लड़की.. और वो खुद queen बनी हो या ना बनी हो,
पर तुम्हे वो अपना king बना लेती है..
और चल पड़ती है तुम्हारे साथ ये सोच कर,
कभी तो वो तुम्हारी queen बन जाएगी..
तुम्हारे हर ख्वाब को जीती है,
तुम्हारी हर खुशी को अपनी खुशी मानती है,
जिंदगी भी उलझी हो उसकी,
पर वो तो queen है ना,
हर उलझन को सुलझा लेती है,
और तुम्हे मुस्कराना सिखाती है..
वो खुद को queen समझ कर,
तुम्हारी queen समझ कर,
आगे बढ़कर तुम्हारे साथ खड़ी रहती है,
और आने हर फर्ज,हर कर्तव्य को,
पूरा करती चली जाती है,
सिर्फ एक ख्वाइश में कि
इक दिन तुम भी,
उसे अपनी queen मान लोगे..!!!

Sunday, 28 October 2018

कभी तो समझोगे......!!!

कभी तो समझोगे ..
इन गुजरते पलो की अहमियत को,
कभी तो तुम समझोगे...
मुस्कराती आंखों की उदासियों को,
इस तरह नाराजगी से क्या मिलेगा,
जो कुछ पल मैंने संजोये है तुम्हारे लिए,
क्यों तुम खराब करते हो..
छोटी-छोटी बातों पर,
इतना उलझना क्यों..?
क्यों ना इन छोटी-छोटी खुशियों को जी लो..
कभी तो तुम समझोगे,
जिंदगी के जीने को,
थक चुकी हूँ तुम्हे तुम्हारे तरीके से,
मनाते-मनाते,
तुम्हे समझ कर खुद को समझाते-समझाते..
अब बस अब और नही...
मुस्कराहट अब और जिंदगी से ना छीन पाऊंगी..
गर तुम इस तरह तोड़ते रहे,
छोड़ते रहे..इन पलो को..
हार कर मैं भी इक दिन बिखर जाउंगी..
फिर ना कोई मुस्कराहट मेरे होठो पर सजेगी..
तुम्हें तब इन्जार तो रहेगा,
फिर ना मैं मुस्कराते हुए,
जिंदगी की बाते तुमसे करूंगी...
कभी तो समझोगे......
जिंदगी की अहमियत को...!!!

Saturday, 27 October 2018

सब बहाने ही तो है.....!!!

करवाचौथ तो सिर्फ बहाना है,
फिर इक बार तुम्हारे लिए सिर्फ,
तुम्हारे लिए सजने सँवरने का...
तुम तारीफ करो,मुझे चाँद जैसा कहो..
बस आज तो चाँद को चिढ़ाना है...
इक बहाना है तुमसे अधिकार से,
अपने लिए वक़्त निकालने का,
तुमसे अपने लिए कोई तोहफा मांगने का...
सब बहाने ही तो है,
जिंदगी की जद्दोजहद से,
तुम्हे अपने पास कुछ देर बिठाने का..!!!.