Saturday, 11 August 2018

सिर्फ तुम्हे देखना चाहती हूं..

कभी तुम्हारे साथ..
सुबह की पहली किरण देखना चाहती हूं,
तुम्हारे साथ..
शाम को ढलते हुए देखना चाहती हूं..
तुम्हारे साथ...
चांदनी रात में बैठ कर बाते करना चाहती हूं..
पूरी दुनिया देख पाऊं या ना पाऊं..
पर तुम्हारी आँखों मे पूरी दुनिया की,
खुशियां देखना चाहती हूं...
तकदीरों में क्या लिखा है,ये नही जानती,
पर तुम्हारी हथेलियों में..
अपना चेहरा देखना चाहती हूं...
तुम्हारे साथ उम्र का,
हर पड़ाव देखना चाहती हूं,
तुम्हे मेरी भी उम्र लग जाये..
मैं साथ तुम्हारे बूढ़ी होना चाहती हूं...
धुंधली होती आँखों की रोशनी के साथ,
मैं सिर्फ तुम्हे देखना चाहती हूं..!!!

Wednesday, 20 June 2018

बोगनवेलिया......!!!

बोगनवेलिया...ये नाम पहली बार,
तुम्हारी जुबां से सुना था,
पता नही क्यों तुम जितनी बार ये नाम लेते थे,
मुझे उतना ही सुनना अच्छा लगता था..
सच कहूं तो तुमसे ही जाना था,
इस फूल के बारे में,
बहुत ही खूबसूरत फूलो के,
गुच्छे से लदी इसकी डलिया थी,
जैसे मन को अपनी तरफ खिंचती थी,
सच कहूं जब तुम नही होते थे,
तब भी मैं घंटो इन फूलों में,
तुमको देखा करती थी,
सोचती थी ये इतनी खूबसूरत है कि,
तुम्हारी नजरो अपनी तरफ खींच लेती है,
तुम कैसे इन्हें जी भर कर देखा करते थे..
तुम्हे पता है सोचती थी कि,
इस जन्म में मैं तुम्हारे साथ हूँ,
गर अगले जन्म में...
मैं तुम्हारी साथ ना भी रही तो बस,
मैं तुम्हारे आंगन में बोगनवेलिया बन कर,
तुम्हारे घर को सजाती रहूं,
तुम यूँ ही जी भर कर मुझे देखते रहना...
और धीरे से अपने मन मे मेरा नाम पुकार लेना...बोगनवेलिया...!!!

Tuesday, 29 May 2018

तुम  संग इतिहास महसूस करना चाहती हूं..!!!

मैं तुम्हारा हाथ थाम कर घूमना चाहती हूं,
पूरी दुनिया...देखना चाहती हूं,
वो अजंता एलोरा की चित्रकारी..
तुम्हारी उंगलियों के अपनी उंगलियों से छू कर,
उन्हें जीवंत कर देना चाहती हूँ...
तुम संग मैं इतिहास महसूस करना चाहती हूं....
देखना चाहती हूं,प्यार की निशानी ताजमहल को,
जिसे शब्दो की कोई जरूरत ही नही..
उसकी खूबसूरती ही बहुत है,
ये बताने के लिए...
प्यार से जिंदगी ताजमहल सी हो जाती है..
देखना चाहती हूं उन तमाम शिवालयों को,
जिनकी घंटियों में गुजंती है,
ना जाने कितनी कहानियां,
पूरी होती हर ख्वाइश देखना चाहती हूं,
जिनके दरों पर कितने मन्नतो के धागे ,
आज भी बंधे है,
तुम संग मैं भी इक मन्नत बांध देना चाहती हूं,
जन्मो-जन्मो के लिए,
तुम्हारा साथ बांध लेना चाहती हूं..
चाहती हूं,..जब भी इतिहास दोहराया जाए,
हर राह..मेरे तुम्हारे कदमो के निशान पाये...
तुम  संग इतिहास महसूस करना चाहती हूं..!!!

Sunday, 8 April 2018

संग अपने ले जाने को..!!!

ये बारिशें तुम्हारे मेरे साथ की,
गवाह बन गयी है,
बूंदों ने संग-संग हमे जो छू लिया है..
कुछ और वो भी जवां हो गयी है..
गीली मिट्टी की खुसबू,
हमारी सांसो में यूं घुल गयी है,
दूर क्यों ना हो इक-दूजे से हम,
हमारे साथ को समेटे हुए,
हवाएं भी चलने लगी है...
पेड़ो से झरते ये फूल और पत्तियां,
तुम्हारी मुस्कराहटो पर न्योछावर हुए जाते है,
मैं नही हूँ जो कभी तुम्हारे साथ तो क्या,
तुम्हारी राहो में झरते गुलमोहर,
मेरा प्यार बन कर बिछे जाते है..
जब कभी भी काली घटाएं जो छा जाये,
बादल जो तुम्हे छूने को बेकरार होकर घिर आये,
तो समझ लेना,मैं आयी हूँ तुम्हारे पास,
संग अपने ले जाने को..!!!

Saturday, 7 April 2018

खुद को हार कर जीत लिया है...!!!

इक बार मैं फिर उसे समझा रही थी,
तुमने उसे सालो दे दिए,
फिर भी उसे समझ नही पायी हो..
किसी ने उसे अपने लम्हे दिए,
और तुमसे ज्यादा वो उसे समझती है...
क्यों कि तुम उसका सहारा बनना चाहती थी,
और वो उसका हर कदम साथ देना चाहती है..
जाने कैसे तुम उसकी आँखों मे,
वो खुशी नही देख पा रही हो,
जो अब उसकी आँखों मे,
उसके साथ के साथ दिखती है..
तुममे और उसमें सिर्फ फर्क है इतना,
तुम जीत कर उसे जीतना चाहती हो,
और उसने खुद को हार कर,
उसे जीत लिया है..!!!

Thursday, 15 March 2018

हाँ तुम नही हो...!!!

हाँ तुम नही हो,फिर भी तुम्हारा एहसास ,
इस जगह में है..
तुमने कितने करीने से,
चीजो को समेट कर रखा है,
और मैं फिर बिखेर कर समेटती हूँ,
तुम्हारे हाथों से छू कर रखी चीजो में,
तुम्हारी छुअन का एहसास महसूस करती हूं,
हाँ तुम नही हो...!!!

Tuesday, 6 March 2018

कमिया तुममे दिखी ही नही...!!!

तुमको जो समझ लिया अब,
किसी और को समझने की जरूरत ही नही,
सभी ख्वाइशें,सपने तुम पर आ कर ठहर गए,
अब कुछ सजोने की मुझे जरूरत नही..
कमिया तुममे दिखी ही नही,
इतनी खूबियां ढूंढ ली है तुम में.....!!!