Monday, 9 September 2019

मेरी सारी उपलब्धियां तुम्हारी हो....!!!

इक कहानी सिर्फ तुम्हारी मेरी हो...
जिसमे तुम हँसते हो तो,मैं हँसती हूँ,
तुम उदास जो हो..तो मैं भी उदास होती हूँ...
इक लम्हा सिर्फ तुम्हारा मेरा हो,
जिसमे तुम गुनगुनाते हो,
तो मैं तुम्हारा संगीत बन जाऊं,
इक नजारा सिर्फ तुम्हारा मेरा हो,
तुम्हे देखती वो नज़र मैं बन जाऊं...
इक रस्म सिर्फ मेरी और तुम्हारी हो,
राह चाहे कोई भी हो,सफर कैसा भी हो,
तुम आगे जो चलो,तुम्हारा हाथ थाम कर,
तुम्हारे साथ मैं भी चलूँ..
इक वादा सिर्फ मेरा और तुम्हारा हो,
वक़्त चाहे जैसा हो,हालात चाहे जैसे हो,
ना मैं तुम्हारा साथ छोडूं,ना तुम्हे खुद से दूर जाने दो... इक एहसास सिर्फ मेरा और तुम्हारा हो,
किसी भी दुख में हम इक दूसरे को,
सांत्वना दे सके या नही,
पर साथ बैठ कर जी भर रो कर..
इक-दूजे को सम्हालते रहे...
इक कसम सिर्फ मेरे और तुम्हारी हो,
छोड़ कर एक-दूसरे का साथ,
हम कभी जाए..
सांसे जितनी भी इक-दूजे के जीवन से बंधी रहे..
पर हाँ एक बात सिर्फ मेरी हो,
तुम्हारे सारे दुख,तुम्हारी सारी असफलताएं,
तुम्हारी हर कमजोरी मेरी हो...
मेरी सारी खुशियाँ,
मेरी सारी उपलब्धियां तुम्हारी हो....!!!

Wednesday, 14 August 2019

तुम्हारा जन्मदिन मेरे लिए....!!!

तुम्हारा जन्मदिन मेरे लिए,
इक उत्सव की तरह होता है..
सूरज तो रोज़ की ही तरह निकलता है ,
पर आज कुछ अलग सा महसूस होता है...
सभी रंग कुछ अलग निखर कर दिखते है..
सब कुछ होता तो और दिनों की तरह पर
तुम्हारा जन्मदिन मुझे नाचने,
मुस्कराने कुछ अलग सा करने को मन करता है..
क्यों दीवाली की तरह दीपो की लड़ी लगा दूँ..
रौशन तुम्हारा हर दिन हो ,
हर दीपक तुम्हारे नाम के सजा दूँ...
मुस्कराहटें तुम्हारे होठो पर,
सारी दुनिया की सजा दूँ..
मुमकिन हो तो अपनी जिंदगी का हर दिन तुम्हारे जन्मदिन के साथ जोड़ दूँ...
उम्र तुम्हे लग मेरी भी,
दुआए सारी तुम्हारे लिए मांग लूं...!!!

Tuesday, 23 July 2019

इशारे समझ जाते....!!!

पैरों में पाज़ेब बांध कर मैं तुम्हारे आंगन में,
झूमना चाहती हूं...
घुंघुरुओ की छम-छम के साथ,
तुम्हारे सुरों को अपने सुरों में पिरोना चाहती हूं....
मैं तुम्हारी तुम्हारी बातो का जवाब,
अपने घुंघुरुओ की छम-छम से देती,
तुम मेरे घुंघुरुओ के लहजे से समझ जाते,
अंदाज़ मेरे रूठने और मानने के..
कभी जो ना छनकती मेरे घुंघुरुओ की आवाज़,
तो मेरे उदास होने के इशारे समझ जाते....!!!

Sunday, 9 June 2019

फिर इक बार तुम्हे लिखती हूँ मैं..!!!

तुम्हे आज लिखती हूँ मैं,
फिर इक बार तुम्हे लिखती हूँ मैं...
उजली सुबह लिखती हूँ मैं,
ढलती शामे लिखती हूँ मैं..
गहरी खमोश राते लिखती हूँ मैं..
फिर इक बार तुम्हे लिखती हूँ मैं..
मन की पगडंडियाँ,
सँकरी गालियां लिखती हूँ मैं,
मेरी तुम्हारी प्रेम की गवाह,
सहेलियां लिखती हूँ मैं...
फिर इक बार तुम्हे लिखती हूँ मैं..
सिरहाना धरती का लिखती हूँ मैं,
बाहें आसमान की लिखती हूँ मैं..
गले लगा कर भिगोती बारिशें लिखती हूँ मैं..
फिर इक बार तुम्हे लिखती हूँ मैं..
खूबसूरती चाँद सी लिखती हूँ मैं,
बेरुखी सूरज सी लिखती हूँ मैं...
सुकून तुम्हारे साथ जिंदगी लिखती हूँ मैं..
फिर इक बार तुम्हे लिखती हूँ मैं..!!!

Saturday, 8 June 2019

बैठी हो साथ मेरे...!!!

उम्र के इस पड़ाव में उसका साथ छूट जाना,
तब सिर्फ सांसे चलती है,
जीना तो वो अपने साथ ले जाता है...
बहुत अरमानो से हमने घर बनाया था,
इक-दूसरे के प्यार में एक-दूसरे के,
रिश्तो को सम्हाला, संजोया..
बहुत खुशिया,दर्द,अधूरी चाहते,
समेट अपने अंदर..और मेरे तुम्हारे रिश्तो को,
हमने को हमारे रिश्ते बना कर,
रूठते,मनाते इक उम्र गुजारी थी हमने...
कुछ ख्वाइशें मैंने तुम्हारी पूरी कर दी थी,
उम्र इस पड़ाव पर,
और कुछ ख्वाइशें पूरी करने का,
वादा किया था,उम्र के उस पड़ाव पर.
हमने मिल कर सोचा था,
जब सारी जिम्मेदारियां पूरी हो जएँगी,
तब हम सिर्फ इक-दूसरे की ख्वाइशें पूरी करँगे,
तुम जो कहोगे वो मैं तुम्हारे लिए खाने में बनाऊंगी,
मै जो कहँगी वो तुम मेरे लिए लाओगे...
यही तिनको को जोड़ कर रखा था,
इक-दूसरे के लिए..बहुत सारी बाते तो,
अभी भी सीने में अभी भी छिपी थी..
तुमसे कहनी थी यूँ फुरसत में,
गार्डन में बैठ कर,तुम्हारे हाथों की...
एक कप चाय पीते-पीते...
यही फुरसत के पलो का,
इंतजार ही तो कर रहे थे,दोनो साथ-साथ,
अब साथ कहाँ रहा साथ मेरे,
तुम्हारे साथ कि तलाश,
मैं घर का कोना तलाशता हूँ,
जिस तरह तुम करीने से सवांर कर रखती थी चीजे,
मैं भी उन्हें रख देता हूँ,जब थक कर बैठ जाता हूँ,
तुम्हारे साथ कि तलाश करते-करते,
तभी इक पल के लिए ये महसूस होता है,
कि तुम आ कर मेरे काँधे पर,
सर रख कर बैठी हो साथ मेरे...!!!

Sunday, 19 May 2019

रिश्तो में ठगी गई हूं मै...!!!

रिश्तो में ठगी गई हूं मै...
ना जाने किसने सिखाया था,
याद नही किसने बताया था..
कहाँ से मुझमे ये हुनर आ गया,
रिश्तो को निभाने का..
भावुक थी हर रिश्ते को,
जज्बातों से निभाती रही..
दिमाग से चलने वाली दुनिया मे,
दिल से रिश्ते निभाती रही हूं मैं...
रिश्तो में ठगी गयी हूँ मैं...
मैंने तो उन रिश्तो को भी,
अपने खून से सींचा है,जो खून के नही थे..
उस रिश्ते के भी सातों वचन निभाये,
जो फेरो में बंधे भी नही थे...
कोई साथ देगा या नही देगा,
बिना ये सोचे इन रिश्तो के लिए,
दुनिया से लड़ गयी हूँ..
आज जब पीछे मुड़ कर देखती हूँ,
तो अकेली ही खड़ी हूँ मैं...
निश्छल समर्पित रही इन रिश्तो के लिए...
आज वही रिश्ते,
सवाल बन कर खड़े है सामने,
पूछते है कि क्या हमने कहा था?
रिश्तो को निभाने को...
इस बचकाने से सवाल पर,
खुद पर हँस पड़ी हूँ मैं...
कि रिश्तो में ठगी गयी हूँ मैं...!!!

Wednesday, 3 April 2019

वो लाल रंग की चूड़ियां...!!!

वो लाल रंग की चूड़ियां,
आज भी सम्हाल कर रखी है करीने से,
जब भी चाहती हूं...
कि तुमसे कुछ बाते कर लूं,
हाथो में पहन लेती हूं,खनकती,चहकती है,
मेरी हर बात का जवाब देती है..
मेरे पास चूड़ियां तो और भी रंगों की है,
पर ना जाने क्यों,ये लाल रंग की
तुम्हारी दी हुई चूड़ियां,
अपनी कलाई पर,
तुम्हारे स्पर्श का एहसास कराती है,
जब इन्हें पहनती है,
तो लगता है कि जैसे,
तुम मेरा हाथ थाम कर चल रहे हो...!!!

Saturday, 16 March 2019

एक ही जिंदगी है,एक ही तुम हो..!!!

मैं वक़्त को तुम्हारे साथ अपनी मुठ्ठियों में,
बांध लेना चाहती हूं..
एक ही जिंदगी है,एक ही तुम हो.
तुम्हे जी भर जी लेना चाहती हूं...
मैं आसमां को अपने आँचल में,
भर लेना चाहती हूं..
एक ही जिंदगी है,एक ही तुम हो,
तुम संग उड़ जाना चाहती हूं..
हर राह को मंजिल मान लेना चाहती हूं,
एक ही जिंदगी है,एक ही तुम हो,
हर सफर तुम्हारे साथ तय करना चाहती हूँ...
हर रिश्ते,हर अंदाज़ में,
तुम्हे ही पाना चाहती हूं...
एक ही जिंदगी है,एक ही तुम हो,
तुम्हारे संग तुम जैसी हो जाना चाहती हूं...
रंग होली के,चमक दीवाली की..
नजारे सभी तुम्हारी आँखों से देखना चाहती हूँ...
एक ही जिंदगी है,एक ही तुम हो..
तुम्हारे एहसास को हर त्योहार में,
महसूस करना चाहती हूं...आहुति

Thursday, 7 February 2019

चलो फिर आज बता ही देती हूं...!!!

चलो फिर आज बता ही देती हूं,
वो सब कुछ आज तक कभी,
तुमसे कहा ही नही..
कि बात कोई भी हो मेरे जीवन की,
तुम्हारी बात होती है...
बता ही देती हूं,छुप कर बहुत बार,
तुम्हारी आँखों को खुशी चुम भी लेती हूं..
बता ही देती हूं,
कि मेरी लिखी हर पंक्ति में,
ज़िक्र सिर्फ तुम्हारा होता है,
जीत हो हार हो,तुमसे शुरू,
तुम पर खत्म सारा जीवन होता है...
बता ही देती हूँ कि तुम्हे जो भी पसंद है,
वो सब अब मेरी पसंद हो गई है,
अब जिंदगी मैं तुम्हारी आखो से देखती हूँ..!!!

Thursday, 10 January 2019

किताबो के बाजार में...!!!

मैं आज फिर पहुँची,
किताबो के बाजार में,
हर किताब को मैंने गौर से निहारा,
हर अक्षर को छू कर देखा..
कि कोई पंक्ति रच कर,
तुमने मेरे लिए किसी किताब में रख दी होगी..
मैं ढूंढ लूं,वो चिट्ठियां जो तुमने लिखी तो होगी,
पर मुझे भेजी नही होगी...
हाँ मुझे याद है तुमने कहा था,
इक दिन कि जब मैं तुम्हे कही ना मिलूं,
तो तुम मुझे किसी पुस्तक मेले में,
किसी किताब में..
किसी पंक्ति में ढूंढ लेना,मैं मिल जाऊंगा..
अक्षरों को छू कर महसूस कर लेना,
मेरे दिल का हाल..
यही सोच हर बार,
मैं आती हूँ पुस्तक मेले में,
ढूंढती हूँ तुम्हे हर किताब में,
हर अक्षर में..
तुम तो मुझे कही नही मिलते,
पर हाँ तुम्हारा लिखने का अंदाज़,
जिन पंक्तियों में महसूस कर पाती हूँ,
मैं वो सारी किताबे ले आती हूँ,
ये सोच कर शायद तुम होते तो ,
तुम भी उन्हें ही पढ़ते..
ले जाते अपने साथ...
छोड़ आती हर किताब में,
अपनी उंगलियों की छुअन,
कि शायद तुम भी मुझे ढूंढते हुए,
कभी यही आ जाओ....!!!

Monday, 7 January 2019

किताबो के बीच, तुम्हे ढूंढती हूँ...!!!

मैं कभी बिखेर किताबो के बीच,
तुम्हे ढूंढती हूँ,
बस यूं ही....
शायद तुम मुझे मिल जाओ,
किसी पंक्ति में,किसी शब्द में...
पर ऐसा होता नही है..
मैं पहरों किताबो को निहारती हूँ,
तुम्हे वहां ना पा कर वापस,
उन्हें सहज कर रख देती हूं...
इस उम्मीद में तुम कभी तो मिल जाओगे,
यही कही किताबो में..
मैं तुम्हे पा ही लुंगी यूँ ही शब्दों में..
निहार लुंगी तुम्हे जी भर,
मन भर कर पढ़ लूंगी तुम्हे..!!!