Wednesday, 19 April 2017

यूँ ही तुम्हारे साथ इक सफर याद आ गया...!!!

यूँ ही तुम्हारे साथ इक सफर याद आ गया...
मेरी गोद में तुम सर रख सो रहे थे,
और मैं तुम्हे निहार रही थी...
और रेलगाड़ी की खिड़की से चाँद,
हम दोनों के साथ-साथ चल रहा था...
इक सुकून था तुम्हारे चेहरे पर,
और इक मुस्कराहट थी,
तुम्हे निहारते मेरी आँखों में....
बहुत बेचैन था,
उस सफर पर वो चाँद,
अपनी चांदनी की याद में...
हम दोनों को देखने को,
चाँद हमारे पीछे-पीछे भाग रहा था,
वैसे तो मुझे हर रोज चिढ़ाता था,
चाँद अपनी चांदनी के साथ...
आज तो मैं भी चाँद को देख कर,
यूँ मुस्करा रही थी,
कि जैसे कह रही हूँ..कि आज तो,
मैंने भी अपने चाँद के साथ हूँ..

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