Thursday, 9 March 2017

कभी" और "काश"...!!!

कभी तुम्हारी हथेली से,
अपनी हथेली को जोड़ कर,
चाँद बनाना चाहती थी,
कभी अपने गालो से तुम्हारे गालो पर,
गुलाल लगाना चाहती थी...
सभी ख्वाइशें "कभी" और "काश"
पर आ कर ठहर गयी...
तुम वक़्त कभी निकाल नही पाये,
मैं वक़्त को थामे बैठी रही,
जिंदगी तुम्हारे-मेरे वक़्त से,
बहुत आगे निकल गयी....

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