Wednesday, 29 March 2017

वो तुम्हारी आँखों की खामोश बाते..!!!

वो तुम्हारी आँखों की खामोश बाते,
ना जाने कब मुझे समझ आने लगी,
वो कुछ ना कह कर तुम्हारा मुस्करा देना,
ये अंदाज़ तुम्हारे....
ना जाने कब मेरी धड़कनो को बढ़ाने लगे..
मंजिले तो कब की,
मैंने पीछे छोड़ दी,
ना कब तुम्हारे साथ...
ये सफर ही मुझे रास आने लगे....
वो चाँद,वो तारे,
वो रातो की बाते अब लिखी जाती नही मुझसे..
अब तो मेरे ख्यालो में,
सिर्फ तुम्हारे एहसास मुस्कराते है,
मेरी धड़कनो से तुम्हारे जज्बात,
मेरे शब्दों में लिखने लगे...
वो तुम्हारी आँखों की खामोश बाते,
ना जाने कब मुझे समझ आने लगी..!!!

8 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल गुरूवार (30-03-2017) को

    "स्वागत नवसम्वत्सर" (चर्चा अंक-2611)

    पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शुक्रवार 31 मार्च 2017 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  3. बहुत ख़ूब !सुंदर रचना

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  4. सुन्दर शब्द रचना

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  5. सुन्दर शब्द रचना

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  6. सुन्दर रचना

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