Tuesday, 31 January 2017

फिर वही गुलाबो के महक..फिर वही फरवरी है..!!!

वही बचपन का प्यार,
वही गुलाबो का इकरार...
किसी को ढूंढती हमारी आँखों की कशिश,
वही सिद्दत कि मिल जाये कोई,
तो न्योछावर जन्मो का प्यार...
बचपना ही तो था,पागलपन था,
पर बहुत खूबसूरत किसी के ना होने,
पर उसके मिल जाने का इंतजार...
फिर वही गुलाबो की महक है,
फिर वही आँखों की कशिश है...
फिर वही फरवरी है....!!!

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