Friday, 30 September 2016

अनकही.... आधी-अधूरी!!!

आज सुबह कुछ नयी सी लगी,या यूँ कहूँ की वही कुछ दिल में छिपे एहसासों को लिये,नई सी लगी..मन में इक अनजानी सी ख़ुशी,जैसे मन की ख्वाब में परियों से मुलाकात हुई हो,वही ख़ुशी जब तुमसे पहली बार मिली थी,वही गुदगुदी सी जब तुमने पहली बार मेरे हाथों को अपने हाथों में लिया था...जब से जगी हूँ बस इन्तजार में हूँ कि कि तुम किसी बहाने से मेरी तरफ देखो,और मेरी आँखों में वही चमक देख कर बोलोगे..कि क्या आज कुछ खास है...पर तुम्हारा रोज़ का वही रूटीन,जल्दी-जल्दी वाला,वही कप में आधी चाय छोड़ देना,न्यूज़पेपर यूँ ही आधा पढ़ कर,बिखरा छोड़ देना..यूँ ही आधी-अधूरी बात करके,शाम को लौट आऊँगा, तब बात करूँगा..वो शाम फिर कभी नही आयी, और तुम्हारा बातो को अधूरा छोड़ देना....ऐसा नही कि तुमने देखा नही मेरी तरफ,मेरी ही आँखे तुम्हे बांध नही पायी..तुम्हारे इस आधी-आधी बातो ने मुझे भी अंदर से अधूरा कर दिया है...जब तुमने देखा मेरी आँखों को,वो भी आधी-अधूरी ही अनकही कह रही थी....

5 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शुक्रवार 02 अक्टूबर 2016 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि- आपकी इस प्रविष्टि के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (01-10-2016) के चर्चा मंच "कुछ बातें आज के हालात पर" (चर्चा अंक-2483) पर भी होगी!
    महात्मा गान्धी और पं. लालबहादुर शास्त्री की जयन्ती की बधायी।
    साथ ही शारदेय नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाएँ।
    डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि- आपकी इस प्रविष्टि के लिंक की चर्चा कल रविवार (02-10-2016) के चर्चा मंच "कुछ बातें आज के हालात पर" (चर्चा अंक-2483) पर भी होगी!
    महात्मा गान्धी और पं. लालबहादुर शास्त्री की जयन्ती की बधायी।
    साथ ही शारदेय नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाएँ।
    डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  4. हाँ, ऐसा ही होता है

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