Wednesday, 22 June 2016

जब मैं होती हूँ अकेली ...!!!

तुम्हारे साथ हो कर भी,
जब मैं होती हूँ अकेली ...
फिर शब्द भी बयाँ नही कर पाते,
वो टीस दिल की.....
कि जब तुम मिले तो,
मैंने सब कुछ छोड़ कर,
तुम संग होली...
तुम्ही मेरे हमसफ़र थे,
तुम्ही मेरी सखी....सहेली....
किससे कहूँ बात दिल की,
किसके साथ रो लूँ....
तुम्ही तो थे....
जिससे कहती थी सब कुछ,...
पर ना जाने क्यों....
तुम्हारे साथ हो कर भी,
जब मैं होती हूँ अकेली ...
फिर शब्द भी बयाँ नही कर पाते,
वो टीस दिल की.....!!!

1 comment:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बृहस्पतिवार (23-06-2016) को "संवत्सर गणना" (चर्चा अंक-2382) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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