Saturday, 19 March 2016

तुम्हारे साथ वो... होली आखिरी थी...

कहाँ खबर थी,तुम्हारे साथ वो...
होली आखिरी थी...
नही तो जी भर कर...
खेल लेती मैं होली...
तुम्हारी हथेलियों से...
मेरे गालो पर लगा वो गुलाल,
तो कब का मिट गया गया था..
पर तुम्हारी हथेलियों के निशां,
आज भी मेरे गालो पर नजर आते है....
मुझे याद है...जब तुमने हँसते हुऐ,
गुलाल से सिंदूर भर दिया था,
तुम्हारे लिए वो महज...
इक वो होली का रंग था,
पर मेरे लिये जिंदगी जैसे...
उसी इक रंग पर ठहर गयी हो.....
कहाँ खबर थी..
तुम्हारे साथ वो होली आखिरी थी,
नही तो जवाब..
सारे गुलाल के तुमसे पूछ लेती...!!!

4 comments:

  1. आपकी लिखी रचना " पांच लिंकों का आनन्द " पर कल रविवार 20 मार्च 2016 को http://www.halchalwith5links.blogspot.in पर लिंक की जाएगी । आप भी आइएगा

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  2. बहुत सुन्दर

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  3. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (20-03-2016) को "लौट आओ नन्ही गौरेया" (चर्चा अंक - 2288) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  4. बहुत सुन्दर....!

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