Thursday, 4 February 2016

Valentine day खतो की डायरी...!!!

आज रात फिर गुजरी है तुम्हारे ख़तो,
तुम्हारे ख़्यालो में,तुम्हारे ख़तो के,
इक-इक शब्द जैसे मेरे दिल की,
इक-इक बात कहते है.....
गुजरता है हर इक दिन इस ख्याल में,
कि कल तुम्हारा खत,
कितने लम्हों को संजो कर,
मेरे पास होगा..सच ही है ये ख़तो में,
तुम्हारे प्यार का अंदाज़ खूब है...
क़ि फिर आज तुम्हारा खत पढ़ा है...
मेरी हीर,
तुमसे बाते करते-करते मै भूल जाता हूँ,की मुझमे भी तुमसे कुछ कहना है, पर तुम्हारी बाते इतनी प्यारी थी, बस सुनता जाता था,कौन सा रंग तुम्हे पसंद हैं कौन सी बात तुम्हे पसंद है, मेरा कौन सा अंदाज़ तुम्हे पसंद है, सभी कुछ जानना चाहता था, या यूँ कहूँ कि मैं जानना चाहता था की मैं तुम्हारी धड़कनो के साथ धड़कता हूँ या नही....मैं जानना चाहता कि वो पल जब तुम मुझे याद मुस्करा देती हो...मैं तुम्हे बताना चाहता था,कि तुमसे बाते करने के बात भी,मेरे लिये कुछ भी तो गुजरता नही....दिल के किसी कोने में ठहर जाता है...याद बनकर..
                                                   तुम्हारा
                                                     राँझा

2 comments:

  1. वेलेंटाईन डे की भूमिका बना दी है आपने ... प्रेम की सुगंध लिए शब्द ...

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (06-02-2016) को "घिर आए हैं ख्वाब" (चर्चा अंक-2244) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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