Tuesday, 1 December 2015

बिखरी है मेरी कविताएं...!!!

यूं ही बेतरतीब ख़्यालो सी,
बिखरी है मेरी कविताये....
जब जैसा ख्याल आया,
बस वैसे ही हर मोड़ पर,
मेरे ज़हन से पन्नों पर उतरी है..
मेरी कविताये..दो पल,दो शब्द..
दो लाइनों में..
पुरी जिंदगी सी दिखती है,
मेरी कविताये...
ख़्यालो के आसमानों को छुती,
तो कभी उदास शब्दों में,
जमी पर गिरती है..
मेरी कविताये...
मेरे साथ टूटती,
बिखरती है...
तो कभी उम्मीद बन कर,
अंधेरो में जुगनू की तरह,
चमकती है...
मेरी कविताये....
दर्द मेरा कहती है,
तो कभी होंठो पर,
किसी के मुस्कराती है,
मेरी कविताये..
जब कभी बेगानी सी,
दिखती है मुझे,
तो कभी किसी की अपनी,
कहानी सुनाती है...
मेरी कविताये...
मेरे राज तो छुपा लेती है,
तो कभी हर किसी का,
हाल-ए-दिल बताती है..
मेरी कविताये...
किसी का इज़हार जो बताती है..
तो कभी इन्कार भी जताती है,
मेरी कविताये..
किसी की चूड़ियों की खनक,
पर खनकती है,
तो किसी शरारती आँखों के,
इशारे भी बताती है..
मेरी कविताये...
लिखती तो मैं हूँ,
पर हर किसी के लबो पर,
गुनगुनाती है...
मेरी कविताये.....!!!

2 comments:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 3 - 12 - 2015 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2179 में दिया जाएगा
    धन्यवाद

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