Sunday, 29 November 2015

याद है वो तुम्हे चाँद की रात...

याद है तुम्हे वो चाँद की रात,
दूर तक थी चाँदनी...
अपने चाँद के साथ...
चांदनी की स्याह रौशनी में,
मैं बैठी थी थाम कर,
अपने हाथो में लेकर तुम्हारा हाथ...
याद है तुम्हे वो चांदनी रात...
तुम्हारी शरारती बातो की रात,
मेरी शरमाती आखों की रात,
तुम्हारी उँगलियों में उलझती,
मेरी उँगलियों की अधूरी बात..
याद है तुम्हे वो चाँद की रात...
मेरे बेतरतीब बिखरे हुए,
ख्वाबो की रात..
तुम्हारे साथ सिमटे पलों,
लम्हों की रात..,
वो सिर्फ महसूस करने वाले,
एहसासों की रात...
याद है वो तुम्हे चाँद की रात...!!!

7 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" सोमवार 30 नवम्बबर 2015 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  2. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, अपेक्षाओं का कोई अन्त नहीं - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  3. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, धन्यबाद ।

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  4. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगवार (01-12-2015) को "वाणी का संधान" (चर्चा अंक-2177) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  5. बहुत सुन्दर और भावपूर्ण प्रस्तुति ...

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  6. बहुत प्यारी नाजुक सी कविता :-)

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