Friday, 6 February 2015

Valentine..डायरी....तुम सिर्फ मुस्करा देते हो........!!!

तुमसे बाते-बाते..करते-करते..            
वो मेरा यूँ ही रूठ जाना...
और वो तुम्हारा कुछ ना कह कर,
मुझे अपने गले से लगाना...
उस इक लम्हे के लिये ही,
मैं तुमसे बार-बार रूठती थी.....
तुम्हे पता था....कि
मुझसे तुम्हारा नाराज होना..
मैं नही सह पाती थी...
रो देती थी...
मेरा रोना तुम नही देख पाते थे...
तो कभी तुम मुझसे..
नाराज ही नही हुए....
जहाँ मैं गलत होती थी..
वहां भी तुम मुझे मना लेते थे....
मेरी हट जिद पूरी करते थे...
तुमने कभी कहाँ नही पर,
तुम्हारे प्यार जताने का...
अंदाज़ यही था....
अपनी प्यारी बातो में,
तुम मुझको उलझा देते हो...
मैं समझू कुछ उससे पहले,
तुम मुझको बहला देते हो....
हार तो मैं तब जाती हूँ...
मेरे रूठने पर भी जब,
तुम सिर्फ मुस्करा देते हो........!!! 

2 comments:

  1. बहुत सुन्दर रचना

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  2. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 8-2-2015 को चर्चा मंच पर चर्चा - 1883 में दिया जाएगा
    धन्यवाद

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