Saturday, 25 October 2014

इक ऐसा राज बताती हूँ.......!!!

चलो आज मैं तुम्हे...                                 
इक बात बताती हूँ....
जो तुम कभी जान नही पाये...
इक ऐसा राज बताती हूँ.......
तुम्हे मैं जैसी पसंद हूँ....
वैसी तो मैं हूँ ही नही....

तुम्हे पता है...
तुम्हारे साथ को मैंने ऐसा जीया..
खुद में तुमको जीने लगी.....
तुम्हे एहसास भी नही होने दिया...
और कब तुम्हारी पसंद मेरी हो गयी...
तुम्हे पता है...?
मुझे काफ़ी बिल्कुल भी नही पसंद थी...
पर तुम्हे जानना था समझना था..
कुछ लम्हे गुजारने थे तुम्हारे साथ...
ना जाने कब तुम्हे समझते-समझते....
मेरी जुबा को काफी का स्वाद भा गया....

चलो आज मैं तुम्हे इक बात बताती हूँ....
जो तुम कभी जान नही पाये...
इक ऐसा राज बताती हूँ.......
तुम्हे मैं जैसी पसंद हूँ वैसी तो मैं हूँ ही नही....

तुमको जो मैं फुलझड़ी सी लगती हूँ...
हमेशा हँसती खिलखिलाती सी दिखती हूँ....
मैं ऐसी बिल्कुल नही हूँ....
मेरे एहसासों की गहराइयों से,
मेरी उदास गहराई तन्हाई से...
तुम अपरचित ही रहे...
तुम्हारे चेहेरे पर मुस्कराहट,
देखने की मेरी जिद ने..
तुम्हारे साथ ने....
मुझे मेरे बचपन से मिला दिया...

तुमसे तुम्हारी जैसी दिखते=दिखते....
मेरी खुद से मुलाकात हो गयी...
खुद को कही खुद में छिपा दिया था....मैंने
मुझे जो तुम मिले....
यूँ लगा कि हाथ पकड़ कर......
मुझे खुद से मिला दिया तुमने...

चलो आज मैं तुम्हे इक बात बताती हूँ....
जो तुम कभी जान नही पाये...
इक ऐसा राज बताती हूँ.......
तुम्हे मैं जैसी पसंद हूँ वैसी तो मैं हूँ ही नही....!!!

Monday, 20 October 2014

कुछ बिखरी पंखुड़ियां.....!!! भाग-11

88.
बहुत ढूंढने पर भी खुशी अब नही मिलती...
मेलो की दुकानों में....ढूंढा बहुत है... 
मैंने बच्चो के खिलौनो मे...बड़ो के सामानों में.
 89.
कभी-कभी बाते कर लेने से...बाते सुलझ जाती है.… 
90.
मेरे साथ बीते उन खुबसूरत लम्हों को... 
जो तुमने इबादत का नाम दिया है...
मैंने तुम्हारे सजदे में सर झुका दिया है..
91.
कुछ नही है आज....
लिखने को मेरे पास....
तुम कुछ कहो....तो वही लिख दूँ मैं..
92.
कोई मुझे लिखते हुए देखना चाहता है...
कोई मुझे देखते हुए... 
लिखना चाहता है....
किसकी शिद्दत पर...
मैं एतबार करू... 
बहुत उलझन में हूँ....किसे प्यार करू..
93.
फिर कोई खुबसूरत सी बात हो जाये....
मैं तुम्हे याद करू...और बरसात हो जाये..
 94.
मेरा नाम 'आहुति' जब-जब लिया जायेगा....
यक़ीनन तुम्हे भी याद किया जायेगा....
95.
चाहती हूँ मैं कि अपनी हर नज़म.. 
हर पंक्ति तुम्हारे नाम लिख दूँ...
चाहती तो मैं ये भी हूँ कि जब जिक्र प्यार का हो तो....
प्यार मिटा कर तुम्हारा नाम लिख दूँ...
96.
हमे हर रोज इन हवाओं में भी...
तुम्हारी खुसबू का एहसास मिला है....
और तुम कहते हो....
कि हमे मिले हुए अरसा गुजर गया है....
            

कुछ बिखरी पंखुड़ियां.....!!! भाग-10

78.
तुम्हारे हाथों को अपने हाथो में लेकर,
यूँ ही सफ़र तय करना अभी बाकी है...
तुम्हारे सीने पर सर रख कर..
धड़कने सुनना अभी बाकी है....
धडकनों को भी खबर ना हो..
मेरे लबो को तुम्हारे लबो..
कुछ कहना अभी बाकी है...
79.
मेरे धडकनों को जैसे छू कर गया है कोई अभी-अभी...
मुझे भी हिचकियाँ आ रही है...
किसी के लबो ने मेरा नाम लिया है अभी-अभी...
80.
अपना धड़कता दिल तुम्हारे सीने में छोड़ आयी हूँ...
तुम्हारे होटों पर निशानी..
अपनी मुस्कराहटो की छोड़ आयी हूँ...
सभी पढ़ लेंगे अब तुम्हारी आखों में...
कहानी अपनी उनमे छोड़ आयी हूँ....
81.
बारिश की हल्की-हल्की बुँदे...
मुझे तुम्हारे स्पर्श का एहसास दिलाती है....
कभी मेरे पलकों पर ठहरती है...
कभी मेरे होटों पर मुस्कराती है...
82.
कभी-कभी किसी को जीतने के लिये..
खुद को हारना पड़ता है...
 83.
मैं तो हर दिन तुम्हारे लिये करवाचौथ रहती आई हूँ...
सुना है उम्र बढती है...
इसके व्रत रखने से...
मैं तो हर पल अपनी साँसों को..
तुम्हारी सांसो से जोडती आयी हूँ...
अब भी क्या कोई रस्म अदा करनी पड़ेगी..........!
    84.
दिल की बाते है... 
तुमको समझाए कैसे....
बाते कुछ कही नही जाती....
प्यार की हद है कि..तुमको बताये कैसे...
85.
जब कभी जो कही मैं डर जाऊं...
या हार के टूटने लगूं..
तुम मेरा हाथ अपने हाथो में मजबूती से पकड़ कर रखना...
यक़ीनन मैं टूट भी गयी तो..कभी बिखारुंगी नही....     
86.
बेफिक्र तेरा हाथ पकड़ कर चली आयी हूँ मैं...
मेरा तो अब मुझमे रहा नही कुछ...
ख्वाब भी तुम्हारे अपनी आखों में भर लायी हूँ मैं..
 87.
फिर एक सफ़र...न कुछ पाने की उम्मीद...
ना कुछ खोने का डर...सिर्फ इक कोशिश का सफ़र




Thursday, 18 September 2014

तुम्हारी उँगलियों में उलझती....मेरी उंगलिया....!!!

तुम्हारी उँगलियों में उलझती....                   
मेरी उंगलिया..
मेरी उलझनों को सुलझा रही है....
सवाल जो करती...
मेरी उंगलिया,
तो कितने ही बहाने से....
ये बहला रही है...

आज हम चुप-चाप बैठे है...
हाथो में लिये हाथ......
आज बाते हमारी उंगलिया कर रही है.....

जैसे ही डर हमारे दिल में......
बिछड़ने का उठता है.....
उंगलियों की पकड़ और,
कसती जा रही है...
हम नही बिछडेंगे....
आपस में उलझती उंगलिया.......
ये एहसास दिला रही है.......

तुम्हारी उंगलिया जो......
मेरी उंगलियों से...
कुछ कहती है....
तो वो मुस्करा कर लिपट जाती है.....
तुम्हारी उंगलियो  ने की..
जो कोई शरारत तो....
मेरी उंगलिया.....
तुम्हारी उंगलियों में सिमट जाती है......
अरसे बाद मिली है....
तुमसे अफ़साने कितने सुना रही है......

अरे....ये कहा तुमने.....
मेरी उंगलियों से......कि 
धड़कने मेरी थम सी गयी है...
तुम जा रहे हो....
तुम्हारी उंगलियो की पकड़ ढीली सी हुई....
कि.… बैचैनिया बढ़ सी गयी है....
मेरी उंगलिया तुमको रोकती बहुत है.....
कि ना जाओ तुमसे......
अभी बहुत कुछ कहना है... 
तुम्हारी उंगलिया मुझसे.....
फिर से मिलने का वादा करके....
मुझसे जुदा होती जा रही है...........!!!

Sunday, 7 September 2014

कुछ बिखरी पंखुड़ियां.....!!! भाग-9

             71.
तुम्हारे चंद लब्ज़....
मेरी जिंदगी भर के जख्मो का मरहम बन गए.....
एक झूठ ही सही.....
कुछ सच्चे ख्वाब आखों में सज गए......!!! 
              72.
कुछ सोचती हूँ....एहसासो को शब्दो में बांध कर,
तुम तक भेजती हूँ..... 
तुम पढ़ो न पढ़ो.....ये मर्जी तुम्हारी है....! 
               73.
तुम मुझे यूँ ही जीने के एहसास देते रहना..
मैं तुम्हे शब्द देती रहूंगी...
तुम्हे मुझे यूँ ही पढ़ते रहना...
मैं तुम्हे यूँ ही लिखती रहूंगी....
            74.
तुम कहते हो न कि...
मैं अच्छा लिखती हूँ....
और तुम चाहते भी कि...
मैं यूँ लिखती रहूँ तो शर्त है.....
मेरी कि तुम यूँ ही मुझे पढ़ते रहों....
             75.
मेरी रातो का ढलना तुम हो....
मेरी सुबह का निकलना तुम हो.....
             76.
जिन्दगी फिर उन्ही....
राहो पर चल पड़ी है....
कुछ दर्द कुछ ख़ुशी से जो कभी गुजरी थी...
आज फिर आयी वो घडी है......!!! 
               77.
इक जादू कि झपकी देकर.....
मुझे तो तुम्हारी धड़कनो में....
अपना नाम सुनना है......
           

कुछ बिखरी पंखुड़ियां.....!!! भाग-8

         61.
हमे हर रोज इन हवाओं में भी..
तुम्हारी खुसबू का एहसास मिला है....
और तुम कहते हो....
कि हमे मिले हुए अरसा गुजर गया है...
               62.
जितना तेज......
तुम्हारी धड़कनों का शोर था...
उतनी ही गहरी.....
मेरी खामोशिया थी....
जितनी तन्हा तुम्हारी महफिले थी.....
उतनी ही तुमसे रोशन.... मेरी तन्हाईया थी...
                63.
बादलो से ढका सारा आसमां है....
सुबह से ही बरस रही है....
ये बुँदे....
न जाने अपने सीने में इतना दर्द कहाँ से लाया है....
                   64.
मैं बहुत बड़ी writter बनना चाहती हूँ.....
शर्त ये कि.....
तुम उसकी वजह बन जाओ....
                  65.
इक तुम्हारे साथ अब आसमान के तारे
गिनना भी नामुकिन नही लगता.....
इक तुम्हारे बगैर जमी पर चलना भी मुश्किल लगता है......
                    66.
अपनी उदासियों से भागती रही हूँ मैं.....
एक ख्वाब कि तलाश में....
कितनी रातो से जागती रही हूँ मैं..
                   67.
मैंने एहसासो,जज्बातो,ख्वाबो को सजाया है..
अपने शब्दो में, 
जिसने भी पढ़ा है मुझको...
तुमको ही पाया है मेरे शब्दो में.....
                  68.
मुझे क्या पता....?
प्यार क्या होता है....? 
पर हां जब भी तुमसे बात करती हूँ...
होठो पर मुस्कान.....
दिल जोर से धड़क रहा होता है.....!!!
                 69.
कुछ सोचती हूँ....
एहसासो को शब्दो में बांध कर,
तुम तक भेजती हूँ..... 
तुम पढ़ो न पढ़ो.....ये मर्जी तुम्हारी है....! 
                 70.
रिश्ता नही कोई फिर...कोई रिश्ता लगता है 
सब कुछ खो कर...
कुछ ना पाना भी अच्छा लगता है....! 

कुछ बिखरी पंखुड़ियां.....!!! भाग-7

                    51.
बहुत मुस्किल दौर बहुत खूबसूरती के साथ जिया है हमने....
ये पहली बार हुआ कि मुस्करा कर दर्द को भी दर्द दिया है हमने......
                       52.
बादलो ने घेर कर रखा है आसमान को.... 
मेरी आखों को इन्तजार है...
बूंदों के बरसने का....
क्यों की यही बुँदे ही तो है......
जो तुम्हे छु कर मुझ पर बरसती है...
                   53.
आज बड़ी सफाई से किसी ने कहा है मुझसे...
कि इरादतन मैंने कोई गुनाह नही किया...
पर अनजाने में क़त्ल भी हुए है मुझसे.....
                    54.
ये हवाओं के साथ आंधियो का आना...
तुम्हारी यादो के साथ बारिश की हल्की बूंदों से....
मन का भीग जाना....अच्छा लगता है.... 
                    55.
ये पहली बारिश का जादू है...
या तुम्हारे प्यार का पहेला एहसास.......
दोनों मे भी भीगना अच्छा लगता है....
                    56.
कभी यूँ भी हो...यूँ अचानक से तुम मुझे याद कर लो.....
मेरी उम्मीदों से परे ....
जब मुझे इन्तजार न हो....
जब मुझे पता हो कि ये तुम्हारा वक़्त मेरे लिए नही है.....
तभी तुम मुझसे कहो...
कि मेरी पूरी जिन्दगी है तुम्हारे लिये....!!! 
                   57.
जब भी मैंने जिन्दगी को समटने कि कोशिश की.....
किसी का हाथ थाम कर चलने की कोशिश की......
कि तभी हाथो से किसी का हाथ फिसल सा गया....
और काँच की टूट कर बिखरी है जिन्दगी......!!! 
                  58.
खुद को खो दिया है....
भीड़ में वीराने में....
जिन्दगी को कहाँ ले कर आ गये....
बीते हुये कल को भुलाने में.....
               59.
चलो क्यों न इक सफ़र कुछ यूँ तय किया जाये 
जिसकी न कोई मंजिल हो...
न कोई मकसद हो..
क्यों न इक बार यूँ ही बेवजह जिया जाये.......
               60.
धड़कने अब थामने से थमती नही मेरी...
राहे अब सभी जाती है तुम तक.....
क्या कहूँ कि....
मंजिल की मुझे तलाश नही.....
या...मंजिल मिलती नही मुझे........

Friday, 1 August 2014

हाँ मैं जिन्दगी हूँ.......!!!

हाँ मैं जिन्दगी हूँ...                                      
तुम्हे जीना सीखा दूंगी.....
घुल गयी जो..
तुम्हारी सांसो में तो....यक़ीनन..
तुम्हारी सांसो को महका दूंगी.....
हाँ मैं जिन्दगी हूँ.....
तुम्हे जीना सीखा दूंगी.....!


थाम लुंगी तुम्हारे हाथो इक बार.....
तुम्हे दुनिया को जीतना सीखा दूंगी......
इक बार चली जो..
तुम्हारे साथ.......यक़ीनन..
तुम्हारी राहो को आसान बना दूंगी.....
हाँ मैं जिन्दगी हूँ....
तुम्हे जीना सीखा दूंगी.....!

तुम्हे डर है....आसमान की उच्चाईयों से,
तुम्हे डर है....समंदर की गहराइयों से,
इक बार मुझे.....
तुम खुद में..
शामिल तो करो....यक़ीनन...
डर सारे दिल के मिटा दूंगी....... 
हां मैं जिन्दगी हूँ......
तुम्हे जीना सीखा दूंगी.....!

कभी जो तनहाइयाँ तुम्हे घेरेंगी......
मैं गले से तुम्हे लगा लुंगी.....
होटों पर मुझको..
सजा लेना.....यक़ीनन..
उदासियो में चुपके से मुस्करा दूंगी.....
हाँ मैं जिन्दगी हूँ....
तुम्हे जीना सीखा दूंगी....!

कभी जो उलझनों में उलझे तो..
मुश्किलो से लड़ना सीखा दूंगी....
दोस्त बना लो..
तुम जो मुझे....यक़ीनन..
मैं दुश्मनो को भी दोस्त बना दूंगी....
हाँ मैं जिन्दगी हूँ.....
तुम्हे जीना सीखा दूंगी....!

Thursday, 24 July 2014

वो एक कप कॉफ़ी का साथ.....!!!

वो एक कप कॉफ़ी का साथ...                  
बस कुछ लम्हे होते थे हमारे पास....
और उन लम्हों में करनी होती थी......
हमें हजारो बात.......!
मेरे साथ होते हुए भी....
दुसरो को देखती.......
तुम्हारी वो शरारती आंखे..
उतनी ही शरारती थी...........
तुम्हारी वो बाते...............
तुम्हारी हर बात पर....
मेरी मुस्कराती आखों का जवाब.....
कुछ यू था......
तुम्हारे साथ एक कप कॉफ़ी का साथ......!!
सबसे नज़र हट कर....
जब तुम्हारी मुझ पर नज़र टिकती थी.....
तो कुछ सहम कर तुम्हारे चहरे से....
मैं नजरे फेर लेती थी......
डरती थी की कही....
तुम पढ़ न लो मेरी नजरो में......
मेरी दिल की बात.............
वो तुम्हारे कुछ पूछने पर......
मेरा मुस्करा देना.............मैं कुछ कहूँगी.....
तुम्हारी नजरो का वो इन्तजार करना...
नही पता की  कॉफ़ी कैसी थी......
नही जानती की......
वो वक़्त क्यों इतनो जल्दी गुजर रहा था....
मैं उस गुजरते वक़्त को थामना चाहती थी........
तुम्हारे हाथ को थाम कर........
कुछ देर और बैठना चाहती थी..........
कुछ यू था......
तुम्हारे साथ एक कप कॉफ़ी का साथ......!!

Tuesday, 22 July 2014

तुम भी अपना ख्याल रखना..................!!!

मैं जा रहा हूँ पता नही फिर...                       
कब बात हो अपना ख्याल रखना.....!!
यही कुछ आखिरी शब्द थे....
तुम्हारे जो मेरे इनबॉक्स में........ 
तुमने लिख कर छोड़े थे...
उस दिन से आज तक.....
कितनी बार मैंने इनको पढ़ा है...
इक-इक शब्द जैसे...
दिल में गढ़ गये हो......
जितनी बार इन शब्दों को पढ़ती हूँ.....
ऐसा लगा कुछ अधूरे से लगे....
जैसे तुम कुछ और भी कहना चाहते थे.....
अगर मैं होती...
इक कसक सी दिल में.....
तुम ले कर चले गये................!
वैसे तो मैं हर रोज़.....
तुम्हारा इन्तजार करती थी....पर 
उस दिन चूक गयी....
मैं क्यों नही थी....?
जब तुम जा रहे थे......
बार-बार उस इनबॉक्स में पड़े..
मैसज को पढ़ मैं सोचती हूँ..............
मैं तुमसे क्यों नही कह पायी कि ...............
मैं तुम्हारा इन्तजार करुँगी.......
तुम भी अपना ख्याल रखना..................!!!
क्यों नही कह पायी........?
कुछ अधुरा सा अनकहा......
तुम लिख कर छोड़ गये......
कुछ अधुरा सा अनकहा ......मेरे दिल में रह गया.......????

Friday, 18 July 2014

कुछ बाते अधूरी ही अच्छी लगती है.......!!!

                               

बारिश की खुबसूरत रात थी....                                                
मेरे हाथो में तुम्हारे हाथ थे .....
बारिश में भीगते मेरे महंदी वाले हाथ थे...
बारिश में गहराता मेरी महंदी का रंग था...
ये बादलों के गर्जना था....
कि तुम्हारे दिल की धड़कन थी....
तुम्हे भी कुछ कहना था....
कहनी मुझे भी तुमसे कोई बात थी....
गुजर गयी बरसात की वो रात..
कभी पूरी हुई ही नही हमारी वो बात....
कुछ बाते अधूरी ही अच्छी लगती है.......!!!        

                                             

Sunday, 13 July 2014

किताबो में शायद खुद को ढूंढ़ रही थी मैं........!!!

आज किताबो के ढेर में......                      
एक धुल से लिपटी किताब मिली..
पुरानी यादो की साक्षी....
गुजरे लम्हों की गवाही दे रही थी.....
यूँ ही पन्ने पलटते-पलटते....
कुछ धुंधला सा लिखा दिखायी दिया..
जो धुंधला हो गया था....
पर अभी मिटा नही था....
मुझे आज भी याद है...
कि यूँ किताब पढ़ते-पढ़ते...
तुम्हारा ख्याल आया था..
और मैंने मुस्करा कर......
अपने नाम के साथ....
तुम्हारा नाम लिख दिया था....
वो लम्हा गुजर गया....इक अरसा बीत गया....
ये किताब बहुत सारी....
किताबो में कही खो गयी थी...
पर मेरे उन लम्हों की....
मेरी अनजानी मुस्कराहटो की गवाही है.....ये किताब...
 किताब के कुछ और पन्ने पलटे ...
 वही कही कई परतो में मुड़ा हुआ....
एक कागज का टुकड़ा मिला....
अरे ये तो वही ख़त है....
जो कभी तुम्हारे लिए लिखा था...
पर तुमको दिया नही था.....
इक अनकहे डर से कि....
तुम्हारा जवाब क्या होगा.....
मैंने ये ख़त खुद तक ही रखा.....
तुम तक कभी पंहुचा ही नही...
कितनी पागल थी.....
बिना कोई सवाल किये.......
तुम्हारे जवाब के इन्तजार में.....
इक सदी गुजर गयी....
जिन्दगी की कभी इक पल यूँ भी लगा.....
जैसे बेवजह जिन्दगी जी रही हूँ....
खुद को कही भीड़ में खो दिया था मैंने.....
कि आज इन पुरानी यादो के ढेर में.....
मेरे अनसुलझे सवालो के जवाब मिल गए....
इन किताबो में शायद खुद को ढूंढ़ रही थी मैं........!!!

Tuesday, 27 May 2014

कुछ देर और ठहरो साथ मेरे....!!!

कुछ देर और ठहरो साथ मेरे...              
अरसे बाद कुछ लिख रही हूँ मैं....!

कुछ दूर और चलो साथ मेरे,
सदियों से मंजिलो की तलाश में...
भटक रही हूँ मैं....!

कुछ पल और थाम लो हाथ मेरा,
कि फिर एक बार गिर कर..
सम्हाल रही हूँ मैं.......!

कुछ और ख्वाब देख लो तुम साथ मेरे,
कि अरसे से एक ख्वाब के लिए जाग रही हूँ मैं.....!

कुछ दूर और समेट लो मेरे वजूद को,
कि फिर प्यार में.....
टूट कर बिखर रही हूँ मैं...!!!

Wednesday, 23 April 2014

उन पलो को सम्हाल कर रखना है....!!!

उन पलो को सम्हाल कर रखना है....
जिन पलों में..
मैंने तुम्हे हँसते मुस्कारते देखा...
जिन पलों में...
मेरे कदमो से तुम्हारे कदमो को मिलाते देखा....
उन कदमो के निशानों को न मिटने देना है..!! 

उन पलो को सम्हाल कर रखना है....
जिन पलो में..
थी तुम्हारी आखों की वो शरारते....
मेरे होटों पे अनकही सी शिकायते...
उस कशिश को कम नही होने देना है.....!!

उन पलों को सम्हाल कर रखना है...
जिन पलो में...,
सामिल थी इंद्रधनुष से रगों की चाहते तुम्हारी,
ख़ामोशी और मेरी कभी न खत्म होने वाली बाते..
उन बातो दोहराते रहना है......!!

उन पलों को सम्हाल कर रखना है.....
जिन पलो में...
तुम्हारा इनकार के साथ इकरार छिपा था,और..
मेरा इकरार के साथ इंकार शामिल था...
उसी हां ना में अभी कुछ दिन....और...
खुद उलझा कर रखना है........!!

उन पलों को सम्हाल कर रखना है...
जिन पलों में...
सामिल था हमारा वो सबसे नजरे बचा कर,
इक-दुसरे की आखों में देखना...
वो कुछ न कह कर हमारा समझ लेना....
अभी कुछ और उन आखों को पढना है ....
उन पलों को सम्हाल कर रखना है........!!!

Saturday, 1 March 2014

मेरे तो साजन हो तुम...!!!

होगा तुम्हारा कोई नाम....                
लोग पुकारते होंगे,
तुम्हे उस नाम से... जाओ
मैं नही लेती...तुम्हारा नाम 
क्यों कि...
मेरे तो साजन हो तुम...!

बारिश कि बूंदो सा..
भिगोता है जैसे सावन...
तुम्हारे प्यार से कब से,
भीगा है मेरा मन....
मेरा तो वो सावन हो तुम.....
मेरे तो साजन हो तुम....!!

निहारती हूँ पल-पल,
खुद को जिसमे..
करती हूँ सिँगार जिसमे,
मेरा वो दर्पण हो तुम....
मेरे तो साजन हो तुम....!!!

ख्याल से तुम्हारे,
थम जाती है हर धड़कन....
कम्पन से जब सिहर उठता है...
मेरा मन.....इन हवाओ कि...
वो सिरहन हो तुम....
मेरे तो साजन हो तुम.....!!!!

Thursday, 13 February 2014

Happy Valentine day ..दिन प्यार के चलने लगे है...!

तुमसे प्यार हुआ तो,                                 
प्यार के कई रंग.. 
मिल गये हमें...
मौसमों के कई,
रंग मिल गये...!

गुलाबो का भी,
सबब मिल गया...
तुम जो मिले ...
मेरे इंतजार को 
अर्थ मिल गया......!

आँखों को पढ़ने का 
हुनर मिल गया.....
तुम जो मिले.... 
मेरी ज़िंदगी को,
सफ़र मिल गया......!

धड़कनो को अपनी,
हम भी सुनने लगे....
तुम जो मिले ....
तुम्हारी बांहो में..
गिरने और संभलने लगे.....!

तुमसे अनदेखी डोर से बंधने लगे...
तुम जो मिले.....
वादे और कसमो,
को समझने लगे....!

एहसासो को शब्दो में,
हम उतारने लगे ....
तुम जो मिले ....
खतो को छुप-छुप कर,
हम भी पढ़ने लगे है.....!

प्यार से जिंदगी में,
रंग भरने लगे है...
तुम जो मिले ...
तुम्हारी साँसों के साथ..
हम भी जीने लगे है...! 

धड़कने तेज हो गयी  है ..
दिन प्यार के चलने लगे हैं..!

Wednesday, 12 February 2014

Valentine special.......जब से तुम्हारा साथ मेरा हमसफ़र हुआ है

जब से तुम्हारा साथ मेरा हमसफ़र हुआ है 
जब से तुम्हारी हर बात का मुझ पर 
असर होने लगा है.. 
जब से मेरी नींदो का तुम्हारी आँखों में कंही 
घर होने लगा है...!

कभी खेल लगता था मुझे प्यार 
अल्हड़ प्यार मेरा 
तुमसे मिलकर.. 
न जाने कब समर्पण होने लगा ...!

कभी एक जिद थी कि 
सब कुछ मुझे मिल जाये... 
आज सिद्दत से चाहती हुँ 
कि हर ख़ुशी तुम्हारी हो....! 

इस  कदर चाहुँ तुम्हे कि 
हर किसी को 
मुझमे तुम दिखने लगो.! 

फिर धड़कने हों गयी है तेज 
दिन प्यार के चलने लगे है ...!

Tuesday, 11 February 2014

valentine special........खतो के सिलसिले चलने लगे..

अब तो हमारे बीच खतो के 
सिलसिले चलने लगे....!
दिल  के कोरे पन्नो पर
हम उन्हें और 
वो हम जज्बात 
अपने लिखने लगे है ......!                                 

मेरी झुकती आँखों का 
सलाम,
और उनका मुस्कुराना 
शब्दो में पिरो कर खतो पर बिखरने लगे है ....!

कितनी ही अनकही बातो को 

खतो में लिख कर
हम उन तक भेजने लगे है 
हाल खतो से वो भी
हमारा पूछने लगे है....! 

फिर धड़कने हों गयी है तेज 

दिन प्यार के चलने लगे है ...!

Monday, 10 February 2014

valentine special.......... एक वादा तुमसे कर लेते है

आज चलो हम भी कुछ 
वादे कर लेते है..... 
एक वादा तुमसे ले लेते है 
एक वादा तुमको दे देते है.....! 

एक वादा 
तुम्हे कभी तन्हा ना छोड़ने का है मेरा..! 
एक वादा

जिंदगी भर तुम्हारे हाथों को थाम कर चलने का है मेरा....!


                                    
एक वादा 
हर पल तुम्हारे चेहरे पर
मुस्कुराहट को लाने का है मेरा....! 
एक वादा 
तुम्हारी आँखों में ख्वाब सजाने का है मेरा ..!

एक वादा 
तुमसे किये हर वादे हर कसम 
को निभाने का है मेरा ...!

फिर धड़कने हों गयी है तेज 
दिन प्यार के चलने लगे है ...!

Sunday, 9 February 2014

Valentine special....उनका हाथ थाम कर चलने लगे है

आज कल...
उनका हाथ  थाम कर चलने लगे है..!

उनकी बांहो में गिरने 
और संभलने लगे है.... 
एक वो जो साथ हो 
तो ये रास्ता भी 
मंजिल लगने लगे है...!
चँलू किसी भी राह पर 
हर मोड़ पर वो मुझको मिलने लगे है ...!

अब मुस्किल नही कुछ भी 
राहे सब आसाँ लग रही है.... 
बन कर हमसफ़र वो मेरे 
साथ चलने लगे है ...!

फिर धड़कने हों गयी है तेज 
दिन प्यार के चलने लगे है ...!

Saturday, 8 February 2014

Valentine special.....एक नया अहसास लगता है

आज कल ना जाने क्यों 
सब कुछ खास लगता है ....!
चीजे तो वही है 
मैं भी वही हूँ 
पर इन सबका एक नया
अहसास लगता है....!.  

आज कल मेरे जीने कि एक ख़ुशी है कि हर जर्रे में लग रही ज़िंदगी है....! 

किसी के साथ पाँव जमी पर नही पड़  रहे है 
किसी के ख्यालो में आसमान में उड रही हू मैं..!

मेरी साँसों में किसी कि साँसों कि 
खुशबू मिलने लगी है..... 
कि ज़िंदगी किसी के कदमो
 के निशाँ पर
बेफिक्र चलने लगी है....!

फिर धड़कने हों गयी है तेज 
दिन प्यार के चलने लगे है ...!

Friday, 7 February 2014

Valentine special.....आँखों से दिल में उतरना सीख लिया है...

किताबे पढ़ते- पढ़ते न जाने कब 
आँखों को पढ़ना सीख 
 लिया है ...!

किसी ने लबो से कुछ न कह कर 
आँखों से सब कुछ कहना सीख लिया है ..!                
हमने भी किसी कि आँखों से 
दिल में उतरना  सीख लिया है....! 

अब इजहार सारे आँखों के 
इशारो से होने लगे है... 
दूर थे अभी तक जो हमसे.. 
करीब दिल के आने लगे है.....!

किसी कि अनकही बातो को 
लफ्ज़ दे रहे है हम .......!
किसी कि ख़ामोशी भी हम 
समझने  लगे है..... 
फिर धड़कने हों गयी है तेज 
दिन प्यार के चलने लगे है ...!

Thursday, 6 February 2014

Valentine special... हर आहट मेरे दिल को धड़का जाती है ....!

अब ना जाने क्यों ...!
हर आहट मेरे दिल को
धड़का जाती है ...
हर आहट किसी के 
मेरे पास होने का 
अहसास दिल जाती है ...!

हर पल मेरे पास है कोई 
ये अहसास होने लगा है ..!  
अन्जाना हो कर भी कोई 
खास होने लगा है.....! 

चाहते कुछ यू  बढ़ रही है... 
किसी अजनबी पर खुद से भी  
ज्यादा विश्वास होने लगा है ......!

आज कल छुप कर किसी से
तन्हाई में मिलने लगे है ...!
फिर धड़कने हों गयी है तेज 
दिन प्यार के चलने लगे है ...!

Wednesday, 5 February 2014

Valentine special...प्यार के रंग घुलने लगे है

अब रंगो में प्यार के रंग मिलने लगे है 
किसी के आने से मेरी भी जिंदगी में.. 
इंद्रधनुष रंग भरने लगे है....!

प्यार का रंग कुछ एस तरह चढ़ रहा है 

कि चेहरे कि रंगत बदलने लगी है ...!                

किसी के दिए रंगो से
मेरे दिल ने प्यार कि 
रंगोली ऐसी सजायी है....! 
किसी कि डोली आयी है 
तो कही बजी शहनाई है ....!

रंगो में प्यार के रंग घुलने लगे है 

धड़कने तेज होने लगी है ..
दिन प्यार के चलने लगे है ....!

Tuesday, 4 February 2014

Valentine special...कहानिया प्यार कि बुनने लगा

अल्हड़ बचपन अब 
कहानिया प्यार कि बुनने लगा.... !

रात भर जगती आँखों में 
सपने सजने लगे है..    
अब तन्हा किसी के 
ख्यालो में रोने और हसने लगे है...!                              
जीते तो हम पहले भी थे...
किसी  से मिलने के बाद 
कुछ और जीने लगे है....!

फिर धड़कने हो गयी है तेज... 
दिन प्यार के चलने लगे है.....! 

Monday, 3 February 2014

Valentine special...मौसम का रुख फिर बदलने लगा हैं

मौसम का रुख फिर बदलने लगा हैं..
तुम्हारी याद में दिन
गुजरते -गुजरते ...        
शामे  कुछ देर  से ढलने लगी हैं ...!

किसी कि याद में राते गुजरने लगी हैं.. 
हवाओ में फिर हीर राँझा के किस्से.. 
सोनी महवाल कि बाते होने लगी है ...!

धड़कने तेज हो गयी  है ..
दिन प्यार के चलने लगे हैं..!

Sunday, 2 February 2014

Valentine special..असर गुलाबो का होने लगा है ....


मेरी  नज़रे पहले भी खिचती थी                                            

गुलाबो कि रंगत......!


 पर ये गुलाब

 सिर्फ गुलाब 

लगते थे... 

अब ये गुलाब एक खामोश कहानी लगने लगे है....! 

जब देखती हूँ इन्हे.. 

ये तुम्हारे प्यार कि निशानी 

लगने लगे हैं ...!


तुम्हारे दिए गुलाबो कि पंखुड़िया 

आज फिर मेरे ख्यालो को महकाने लगी हैं ....!


कि हम पर असर गुलाबो का होने लगा है 

धड़कने तेज होने लगी हैं.. 

दिन प्यार के चलने लगे है … ..!

Saturday, 1 February 2014

Valentine special..दिन प्यार के चलने लगे है...!

धड़कने हो गयी है तेज,                      
दिन प्यार के चलने लगे है... 
फिर से बरसो पुराने ख़त, 
सूखे गुलाब....
डायरी में कही मिलने लगे है...! 
हवाओ का रुख भी,
बदलने लगा है.... 
जब से मुहब्बतो के,
पत्ते उड़ने लगे है....
खूबसूरत ख्यालो से,
साँसे महकने लगी है.....
हर आहट पर..
दिल धड़कने लगे  है.... 
धड़कने हो गयी है तेज 
दिन प्यार के चलने लगे है.......!!!

Friday, 24 January 2014

तुम्हारे लिए...!!!

तुम्हारे लिए अपनी आखो में लहरो,    
को छुपा कर ला रही हूँ.....
जब तुम देखोगे मेरी आखों में तो,
समंदर कि गहराई और..... 
लहरो कि मस्ती दिखायी देगी.....!
 
तुम्हारे लिए मुठ्ठी में अपने,
कुछ सीप समेट कर ला रही हूँ.....
जब तुम लोगे इन्हे अपनी हथेली में, 
तो कुछ रेत तुम्हारे हाथो से,
लिपटती जायगी......!

तुम्हारे लिए अपनी तरफ,
बढ़ती लहरो कि आवाज़.....वो गरजता समंदर 
दिल में समेट कर लायी हूँ....
जब तुम मेरी धड़कनो को सुनोगे तो,
थिरकती हर धड़कन सुनायी देगी......!!! 

Monday, 13 January 2014

ये कोहरे कि धुंध........

ये कोहरे कि धुंध,                                    
और बादलो से घिरा आसमां....
ठंड से कांपता सारा जहां,
इन सब से दूर मैं तुम्हारे,
ख्यालो में खोयी सी.....!
कोहरा कितना ही गहरा हो,
मेरी आखों को तुम्हारा,
चेहरा साफ़ दिखायी देता है... 
ये सूरज को छिपाते बादल भी,
मुझे तुम्हारे ख्यालो में,
जाने से रोक नही पाते है....!
ये सर्द हवाये भी मुझे तुम्हारी साँसों... कि 
गर्मी का एहसास दिलाती है,
ये ठिठुरती ठंड कि तनहा लम्बी राते.... 
और तुम्हारी कभी न खत्म होने वाली बाते,
मेरी जागती आखों को ख्वाब दिखाती है......!!

ये कोहरे कि धुंध,
और बादलो से घिरा आसमां....
ठंड से  कांपता सारा जहां,
इन सब से दूर मैं तुम्हारे ख्यालो में खोयी सी....! 
अपने कांपते हाथो से,
जिंदगी के पन्नो को पलटती हूँ...
और धुंध को चीरती हुई बीते..
लम्हो कि तस्वीर देखती हूँ....
तुम्हारी यादो में कितनी बार....
टूटती और बिखरती हूँ.….....!!!

Wednesday, 8 January 2014

जिंदगी और तुमसे हार चुकी हूँ.......!!!

रोज़ कि तरह दिन आज भी निकला है 
पर कुछ उदास सा लग रहा है.… 
सर्द रात के ढलते ही ठंठ से ठिठुरता दिन निकला है....
न जाने रात कौन सा ख्वाब देखा है मेरी आखो ने,कि,
खुद को आईने में देखा डरी सहमी सी लग रही है मेरी आँखे....
अभी कुछ समझती कि बदलो की गड़गड़ाहट सुनाई दी.... 
ये क्या इतनी ठंठ में फिर से बारिश शुरू हो गयी....
अभी कल ही बात हुई तुमसे....तुमने कहाँ था.....
कुछ कि अगर अब बारिश हुई तो बहुत नुक्सान हो जायेगा... 
तभी तो जब बारिश हुई तो तुम्हारी बात याद आ गयी... 
मैंने कल तो तुम्हे किसी तरह दिलासा देकर तुम्हे समझा लिया था, 
ये इम्तहान है जिंदगी के ये बता कर... तुमने कुछ देर के लिए मुश्किलो को भुला दिया था 
पर अब क्या कहूँगी तुमसे.....कैसे समझाउंगी तुमको...?
तुम्हे मुश्किलो से टूटते हारते नही देख सकती हूँ..... 
इसी उलझन में उलझी-उलझी.....
कुछ सोचते-सोचते अपने लिए चाय बनाने लगी......
कप को हाथो में लेकर पीने के लिये बैठी पर कुछ खोयी सी, 
सोच रही थी कि तुम ना जाने क्या सोच रहे होगे..... कही बहुत परेशान तो नही होगे..?
कुछ देर तुमसे ध्यान हटा कर...
खुद के बारे में सोचा तो खुद पर हंस पड़ी,
कि तुम्हारी एक मुश्किल मेरी जिंदगी कि....सारी मुश्किलो के सामने बहुत बड़ी लग रही थी...
खुद टूट जाउंगी....तुम्हे टूटने नही दूंगी....तुम्हे हारने नही दूंगी.... 
हम प्यार में कितने कमजोर और कितने मजबूत हो जाते है...आज पता चला 
जब तुम्हारी हर छोटी से छोटी परेशानी मुझे भी परेशान कर देती है... 
अपनी मुश्किलो के हल मिले न मिले..
पर तुम्हारी हर मुश्किल का हल होता है मेरे पास..... 
लो तुम्हारे बारे में सोचते-सोचते चाय ठंठी हो गयी.... 
चलो फिर से चाय बनाती हूँ......और साथ ही सोचती हूँ कि तुम्हे समझाउंगी...
कि जिंदगी इन छोटी-छोटी मुश्किलो से हरा नही करती......
और मुझे यकीन है कि तुम्हे फिर से जिंदगी से लड़ कर जितना सिखा दूंगी....
बशर्ते इस सच को तुमसे छिपा लूंगी कि.......
मैं बहुत पहले ही जिंदगी और तुमसे हार चुकी हूँ.......!!!  

Friday, 3 January 2014

मेरी कविताओ की धड़कन हो तुम...!!!

मेरी कविताओ की धड़कन हो तुम...         
मैंने एहसास लिखे है शब्दो में,
तुम्हारे साथ बीते लम्हो के,
हिसाब लिखे है शब्दो में....
मेरे शब्दो कि बेचैनी,
इनकी तड़पन हो तुम....
मेरी कविताओ की धड़कन हो तुम....! 

तुम्हारे लिए जो किया श्रृंगार,
लिखा है शब्दो में....
तुम्हारे लिए जो छिपा है दिल में,
वो प्यार लिखा है शब्दो में.... 
मेरी चूड़ियों कि खनखन हो तुम....
मेरी कविताओ की धड़कन हो तुम....!

मेरे होठों पर जो सजते है,
तुम्हारे गीत लिखे है शब्दो में... 
तुमसे रूठते-मानते,अपनी हार तुम्हारी जीत...
लिखी है शब्दो में..... 
मेरी साँसों में रहते हो तुम....
मेरा तो पूरा जीवन हो तुम.... 
मेरी कविताओ की धड़कन हो तुम....!!!