Thursday, 14 November 2013

अधूरी रात,.............!!!

वो आधे चाँद कि अधूरी रात,                  
वो अनछुआ अहसास....
वो अनकहे जज़्बात,
आज फिर बहुत याद आयी, 
तुम्हारे साथ गुजरी...
वो अधूरी रात.....! 
वही तारो कि बारात,
वही कही दूर बजती...
शहनाइयों कि आवाज़, 
आज भी सुन रही हूँ....
वही जोर से धड़कती,
तुम्हारी धड़कनो कि आवाज़.....!! 
वही  मेरे साथ परछाई,
बनकर चलती चांदनी का साथ..... 
वही मुझे तुमसे बांधता विश्वास, 
आज भी बेचैन कर देती है 
वो अधूरी रात कि तुम्हारी बात.....!!!

28 comments:

  1. आज भी बेचैन कर देती है
    वो अधूरी रात कि तुम्हारी बात.....!!!

    ............दिल को छूती पंक्तियाँ बेहतरीन अभिव्‍यक्ति बहुत बहुत बधाई सुषमा जी..

    ReplyDelete
  2. मदमाती प्यार भरी रचना, आभार।
    कभी इधर भी पधारें

    ReplyDelete
  3. भावमयी करती रचना...
    बेहतरीन...

    ReplyDelete
  4. ढ़ेर सारा प्यार समेटे हुए है आपकी रचना, बहुत सुन्दर

    ReplyDelete
  5. बहुत सुन्दर जज़्बात....

    अनु

    ReplyDelete
  6. बहुत सुंदर

    मित्रों कुछ व्यस्तता के चलते मैं काफी समय से
    ब्लाग पर नहीं आ पाया। अब कोशिश होगी कि
    यहां बना रहूं।
    आभार

    ReplyDelete
  7. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शुक्रवार (15-11-2013) को "आज के बच्चे सयाने हो गये हैं" (चर्चा मंचःअंक-1430) पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    ReplyDelete
  8. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शुक्रवार (15-11-2013) को "आज के बच्चे सयाने हो गये हैं" (चर्चा मंचःअंक-1430) पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    ReplyDelete
  9. बहुत सुन्दर प्रस्तुति..
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आप की इस प्रविष्टि की चर्चा शनिवार 16 /11/2013 को ज्योतिष भाग्य बताता है , बनाता नहीं ... ...( हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल : 045 )
    - पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर ....

    ReplyDelete
  10. खूबसूरत अभिव्यक्ति...

    ReplyDelete
  11. सुन्दर रचना

    ReplyDelete
  12. प्यार से प्यारी सी रचना

    ReplyDelete
  13. Bahut pyaree aapkee adhuree rat aur us rat kee ye bat.

    ReplyDelete
  14. बहुत बढ़िया सुंदर एहसास को वयां करती
    सुंदर रचना !!

    ReplyDelete
  15. बहुत बढ़िया ..... सुंदर एहसास को वयां करती....
    सुंदर रचना... !!

    ReplyDelete
  16. bahut khub...great!!!
    thanks
    Archana

    ReplyDelete
  17. कविता है या किसी ने गुलाब की पंखुड़ियां बिखेर दी हैं। दूर तक राहें महक उठी हैं।

    ReplyDelete
  18. बहुत संदर रचना...बधाई..

    ReplyDelete
  19. गहरे एहसास लिए ... प्रेम की अभिव्यक्ति ...

    ReplyDelete
  20. प्रेम की सूक्ष्म अनुभूति कराती सुकोमल रचना..

    ReplyDelete
  21. प्रेम की सूक्ष्म अनुभूति कराती सुकोमल रचना..

    ReplyDelete