Friday, 28 June 2013

कुछ कहती है बुँदे.......!!!

मुझ को भिगोती है बुँदे......        
तुम्हारा प्यार बन कर......
मुझे छूती बुँदे.....
तुम्हारा एहसास बन कर....
कुछ कहती है बुँदे.....
तुम्हारी आवाज़ बन कर.....
मुझ पर ठहरती है बुँदे....
तुम्हारी नजर बन कर.....
मुझे थामती है ये बुँदे....
तुम्हारी बाहें बन कर....
मेरे होटों पर बिखर जाती है बुँदे....
तुम्हारी कविता बन कर....
हर कोई अनजान है इनसे.....
मेरे आंसुओं में घुल जाती है बुँदे.....
बहुत रुलाती है बुँदे......
तुम्हारी याद बन कर.....

42 comments:

  1. सुंदर अभिव्यक्ति ....शुभकामनायें ...

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  2. सुंदर अभिव्यक्ति

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  3. bahut kuchh kah kar bhigoti hain ye boonden.
    behtreen prastuti.

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  4. जिस मूड में हो ...वो मूड बडाती बुँदे.....
    शुभकामनायें!

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  5. bahut sundar kavita..

    bahot badhaai

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  6. अति सुंदर

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  7. बूँद बूँद प्रेम. सुन्दर रचना.

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  8. बहुत रुलाती हैं बूँदें
    तुम्हारी याद बनकर ..
    सुन्दर अभिवयक्ति !

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  9. बहुत रुलाती हैं बूंदें
    तुम्हारी याद बनकर ..
    सुन्दर शब्द !

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  10. बहुत खूबसूरत रचना...शुभकामनायें ...

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  11. वाह, बहुत खूब

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  12. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (30-06-2013) के चर्चा मंच 1292 पर लिंक की गई है कृपया पधारें. सूचनार्थ

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  13. आपने लिखा....हमने पढ़ा
    और लोग भी पढ़ें;
    इसलिए कल 30/06/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
    धन्यवाद!

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  14. अति सुन्दर भावोँ की अभिव्यक्ति। वर्षा की बूँदोँ और प्रेम का अद्भुत समन्वय । बधाई । सस्नेह

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  15. अति सुन्दर भावोँ की अभिव्यक्ति। वर्षा की बूँदोँ और प्रेम का अद्भुत समन्वय । बधाई । सस्नेह

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  16. हर रंग को आपने बहुत ही सुन्‍दर शब्‍दों में पिरोया है, बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

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  17. behad khoobsurat khyal.. bahut kuchh kah jati hai barish ki ye bundy

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  18. सुंदर अभिव्यक्ति %%%%% शुभकामनायें @@@@@

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  19. बहुत रुलाती है बुँदे......
    तुम्हारी याद बन कर.....

    बहुत खूबसूरत रचना.

    शुभकामनाएँ.

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  20. बहुत ही सुन्दर और सार्थक प्रस्तुती आभार ।

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  21. सुन्दर और सार्थक प्रस्तुती

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  22. बहुत भावमयी प्रस्तुति...

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  23. बहुत सुन्दर

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  24. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति....

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  25. बहुत ही सुन्दर और सार्थक प्रस्तुती आभार ।

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  26. मेरे आंसुओं में घुल जाती है बुँदे.....
    बहुत रुलाती है बुँदे......
    तुम्हारी याद बन कर.....
    बुँदों और प्रेम का सम्बन्ध शरीर और आत्मा के जैसा होता है ,क्योंकि ये दोनों साफ एवं निष्छल होते हैं !आपने अपनी इस रचना में इसका सुन्दर चित्रण किया है आपको हार्दिक बधाई !
    chitranshsoul.blogspot.com

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  27. बहुत सुन्दर प्रस्तुति,यहाँ भी पधारे

    http://shoryamalik.blogspot.in/2013/04/blog-post.html

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  28. बहुत सुंदर रचना
    बहुत सुंदर

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  29. बूँदें

    मुझको भिगोती है
    प्यार बनकर
    छूती हैं
    एहसास बनकर
    कुछ कहती हैं
    तुम्हारी आवाज़ बनकर
    मुझ पर ठहरती हैं
    तुम्हारी नजर बनकर
    थामती है
    तुम्हारी बाहें बनकर
    मेरे होटों पर बिखर जाती है
    तुम्हारी कविता बनकर
    हर कोई अनजान है इनसे
    मेरे आंसुओं में घुल जाती हैं
    बहुत रुलाती है
    तुम्हारी याद बनकर
    ...मैने ऐसे पढ़ा। कोमल एहसास से आनंदित हुआ।

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  30. sundar rachna

    meri nayi post par aapka swaagat hai...

    http://raaz-o-niyaaz.blogspot.com/2013/07/blog-post.html

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  31. बहुत सुंदर रचना

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