Saturday, 25 May 2013

इस बार लिख दूंगी.....!!!


जब भी कलम उठाती हूँ,सोचती हूँ...                                            
इस बार लिख दूंगी.....
सब उद्गार अपने दिल के 
इन शब्दों से मिल के .....


जब भी कलम उठाती हूँ,सोचती हूँ....
इस बार लिख दूंगी.... 
जीतने के सब गुण 
हार से मिल के...... 

जब भी कलम उठाती हूँ,सोचती हूँ....
इस बार लिख दूंगी.... 
हकीकत में बदलने की तरकीबे 
सपनो से मिल के.... 

जब भी कलम उठाती हूँ,सोचती हूँ...
इस बार लिख दूंगी.... 
इस बार अपने हौसलों की उचाईयां 
आसमा से मिल के.......!!!

29 comments:

  1. शब्द-शब्द में सोच समाई हुई है

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  2. अनकही को लिखना ..वाह!

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  3. सोचा हुआ हमेशा होता नहीं. सुन्दर प्रस्तुति

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  4. जब भी कलम उठाती हूँ,सोचती हूँ....
    इस बार लिख दूंगी....
    हकीकत में बदलने की तरकीबे
    सपनो से मिल के....

    बहुत बेहतरीन सुंदर रचना,,,

    RECENT POST : बेटियाँ,

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  5. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (26-05-2013) के चर्चा मंच 1256 पर लिंक की गई है कृपया पधारें. सूचनार्थ

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  6. अबके सोचिये मत,लिख ही डालिए....
    तोड़ डालिए सारे बंध...

    अनु

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  7. ab likh hi daaliye......bahut khub mam........

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  8. प्रतिभाशाली अभिव्यक्ति के लिए आपकी कलम को मंगल कामनाएं !

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  9. na likhte huwe bhi kaafi kuch likh diya...badhiya andaaz:-)

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  10. अनु से सहमत हूँ ,अब तो लिख ही दें .....

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  11. अब लिख ही डालिए सब कुछ .... सुंदर प्रस्तुति

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  12. sochne me jyaada wakt nahi len bs likh hi daalen .....

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  13. इस बार लिख दूंगी....
    हकीकत में बदलने की तरकीबे
    सपनो से मिल के....
    बेहतरीन

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  14. अनकही को लिखने चाह ..........
    अनुशरण कर मेरे ब्लॉग को अनुभव करे मेरी अनुभूति को
    latest post: बादल तू जल्दी आना रे!
    latest postअनुभूति : विविधा

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  15. काफी कुछ लिख दिया आपने
    बहुत सुन्दर रचना

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  16. आपने लिखा....हमने पढ़ा
    और लोग भी पढ़ें;
    इसलिए कल 27/05/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
    धन्यवाद!

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  17. जब भी कलम उठाती हूँ,सोचती हूँ...
    इस बार लिख दूंगी....
    इस बार अपने हौसलों की उचाईयां
    आसमा से मिल के....

    गजब की चाहत
    करें कोशिश न हो हार चाहत की

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  18. जब तक हौसला बरकरार है तब तक सब कुछ संभव. सुन्दर रचना.

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  19. जीतने के सब गुण ...हार से मिल के ........वाह क्या सोच है ....जीत की मंज़िल हार से हो कर जाती है .....वाह

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  20. जब भी कलम उठाती हूँ,सोचती हूँ....
    इस बार लिख दूंगी....
    हकीकत में बदलने की तरकीबे
    सपनो से मिल के....

    बहुत खूब ... कहीकत को सपनों के सहारे बदलना ... लाजवाब एहसास है ...

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  21. कभी तो लिख ही जाएगा......
    बढ़िया...

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  22. बहुत सुन्दर.
    गहरे भाव और अहसास लिए सुन्दर रचना...
    :-)

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  23. जब भी कलम उठाती हूँ,सोचती हूँ....
    इस बार लिख दूंगी....
    हकीकत में बदलने की तरकीबे
    सपनो से मिल के....

    ...लाज़वाब अहसास...बहुत प्रभावी रचना...

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  24. सुन्दर प्रस्तुति

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  25. बहुत बढ़िया रचना..

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  26. बहुत बेहतरीन सुंदर रचना,,,

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