Thursday, 3 January 2013

तुम्हारी ख़ामोशी.......!!!


बहुत कुछ लिखवा लेती है,              
तुम्हारी ख़ामोशी.......
तुम कुछ कहते भी नही,
न जाने क्या समझा देती है....
तुम्हारी ख़ामोशी...

अब तक जो कुछ लिखा,
जो कुछ भी जाना..वो,
तुम्हारी ख़ामोशी की अभिवयक्ति थी....
मेरे अनकहे एहसासों को शब्द देती है,
तुम्हारी ख़ामोशी....
इन शब्दों का अर्थ होती है,
तुम्हारी ख़ामोशी....

मैं सोच में हूँ की तुम्हारी ख़ामोशी,
इतना क्यों बोलती है ?
मैं जाना भी चाहूं छोड़ कर तो,
खामोश रह कर भी मुझे पुकार लेती है......

तुम्हारी ख़ामोशी......

37 comments:

  1. सुषमा आहुति जी ख़ामोशी की बड़ी तेज आवाज होती है बहुत सुन्दर भावनाओं के साथ खुबसूरत प्रस्तुति ..

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  2. बहुत सुन्दर..खामोशी भी कभी कभी बोल लेती है..

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  3. ख़ामोशी तो
    अपना ही है प्रतिरूप
    जिसकी मौन भाषा पढ़कर
    हम अपनी अभिव्क्ति को देते हैं
    नए नए रूप

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  4. खामोशी की अपनी ही जुबां होती है

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  5. वो आवाज़ जो मुंह के अन्दर बंद करा दी जाती है बहुत देर तक और बहुत दूर तक आती है. सुन्दर अभ्व्यक्ति.

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  6. It's not written by me,but these words express my feelings at best
    Thnx for such lovely avivyakti

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  7. It's not written by me,but these words express my feelings at best.//.
    Thanx for expressing my अभिवयक्ति :)

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  8. Wat better way 2 express ur feelings.,,.m ur fan :)

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  9. मन के भावनाओं के साथ खुबसूरत प्रस्तुति ..,,

    recent post: किस्मत हिन्दुस्तान की,

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  10. ख़ामोशी कभी कभी बड़ा शोर मचाती है.....
    बर्दाश्त के बाहर होता है वो शोर...
    गहन अभिव्यक्ति..

    अनु

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  11. बहुत बोलती है ये खामोशियाँ ...
    भावपूर्ण अभिव्यक्ति !

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  12. ख़ामोशी ...की आवाज़ वही सुन सकता है जिसके पास एक संवेदनशील दिल हो ......आपकी तरह !

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  13. खामोश रह कर भी मुझे पुकार लेती है..
    तुम्हारी ख़ामोशी..

    बहुत सुन्दर संवेदनशील रचना ...

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  14. किसी की ख़ामोशी किसी की ज़बान बोलती है......बहुत सुन्दर।

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  15. वह मौन में ही मुखरित होता है..सुंदर कविता !

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  16. मैं सोच में हूँ की तुम्हारी ख़ामोशी,
    इतना क्यों बोलती है ?
    बिल्‍कुल सच ...

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  17. मौन की भाषा सबसे मुखर होती है.. अच्छी कविता!!

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  18. बेहद सुन्दर...
    बेहद प्रभावी रचना..
    :-)love it:-)

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  19. खमोशी भी एक कला है जो खामोश रहते हुए भी आपके दिल के करीब रहती है।बेहतरीन रचना,धन्यबाद।

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  20. खामोशी की आवाज़ अक्सर दिल को चीर के निकल जाती है ...
    बहुत खूब ...

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  21. सुन्दर रचना

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  22. मैं जाना भी चाहूं छोड़ कर तो,
    खामोश रह कर भी मुझे पुकार लेती है......
    तुम्हारी ख़ामोशी......

    bhavpoorn rachana bahut hi sundar hai sushma ji ...badhai.

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  23. मैं सोच में हूँ की तुम्हारी ख़ामोशी,
    इतना क्यों बोलती है ?

    ...वाह! लाज़वाब भावमयी अभिव्यक्ति...

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  24. apki Rachna ka har Shabd bolta hai ...sundar Rachana..

    मैं जाना भी चाहूं छोड़ कर तो,
    खामोश रह कर भी मुझे पुकार लेती है......
    तुम्हारी ख़ामोशी......
    http://ehsaasmere.blogspot.in/

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  25. apki Rachna ka har Shabd bolta hai ...sundar Rachana..

    मैं जाना भी चाहूं छोड़ कर तो,
    खामोश रह कर भी मुझे पुकार लेती है......
    तुम्हारी ख़ामोशी......
    http://ehsaasmere.blogspot.in/

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  26. बहुत कुछ लिखवा लेती है,
    तुम्हारी ख़ामोशी.......
    तुम कुछ कहते भी नही,
    न जाने क्या समझा देती है....
    तुम्हारी ख़ामोशी...

    ख़ामोशी भी बहुत कुछ कहती है.सुषमा जी बधाई इस ख़ामोशी को शब्दों में बयाँ करने के लिये.

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  27. मैं सोच में हूँ की तुम्हारी ख़ामोशी,
    इतना क्यों बोलती है ?
    मैं जाना भी चाहूं छोड़ कर तो,
    खामोश रह कर भी मुझे पुकार लेती है......
    तुम्हारी ख़ामोशी......
    ..सच ख़ामोशी भी कभी कभी इंतना कुछ बोल लेते हैं जिंतना हम बोल कर व्यक्त नहीं कर पाते ..
    बहुत बढ़िया

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  28. ख़ामोशी, बहुत कुछ कह जाती है।
    सुन्दर!

    --
    थर्टीन रेज़ोल्युशंस

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  29. Bahut dino bad apka blogg visit kar raha hu chhama chahunga:

    खामोश रह कर भी मुझे पुकार लेती है......
    तुम्हारी ख़ामोशी......!

    sach dil me ghar gai gai yah aintim pankti... bahut hi sunder.

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  30. khamoshi ko juban de di aapne...
    shandar..

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  31. bahut achha lkha hai.

    shubhkamnayen

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  32. भावपूर्ण अभिव्यक्ति !

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