Sunday, 16 December 2012

मेरे हाथो की ये चूड़ियाँ न जाने क्या गुनगुना रही है....!!

मेरे हाथो की ये चूड़ियाँ न जाने,                                          
क्या गुनगुना रही है....
खनक-खनक मेरे हाथो में,

याद तुम्हारी दिला  रही है.....

पूछ न ले कोई सबब इनके खनकने का,
मैं इनको जितना थामती हूँ...
नही मानती मेरी बे-धड़क

शोर मचा रही है,
मेरे हाथो की ये चूड़ियाँ

न जाने क्या गुनगुना रही है.....

मैं कुछ कहूँ न कहूँ मेरा हाल-ए-दिल...
मेरी चूड़ियां सुना रही है.....
आज भी तुम्हारी उँगलियों की छुअन से,
मेरी चूड़ियाँ शरमा रही है...
मेरे हाथो की ये चूड़ियाँ न जाने क्या गुनगुना रही है..

मेरी हाथो से है लिपटी,
एहसास तुम्हारा दिला रही है.....
मैं कब से थाम कर बैठी हूँ,
अपनी धडकनों को....
जब भी खनकती है मेरे हाथो में,
धड़कने तुम्हारी सुना रही है.....
मेरे हाथो की ये चूड़ियाँ न जाने क्या गुनगुना रही है..

तुम्हारी तरह ये मुझसे ये रूठती भी है,
रूठ कर टूटती  भी है....
मैं इनको फिर मना रही हूँ....
सहज कर अपने हाथो में सजा रही हूँ,
ये फिर मचल कर तुम्हारी बाते किये जा रही है....
मेरे हाथो की ये चूड़ियाँ न जाने क्या गुनगुना रही है..

44 comments:

  1. इसे मैं कविता की नहीं, गीत की श्रेणी में रख रहा हूँ.. एक विरहिणी की व्यथा और उसके चूड़ी के साथ संवाद के माध्यम से बहुत ही सजीव वर्णन किया है आपने!!

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  2. तुम्हारी तरह ये मुझसे ये रूठती भी है,
    रूठ कर टूटती भी है....
    मैं इनको फिर मना रही हूँ....
    सहज कर अपने हाथो में सजा रही हूँ,

    वाह बहुत खूबशूरत रचना ,,,, बधाई।

    recent post हमको रखवालो ने लूटा

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  3. सुषमा बहन
    सुन्दर कविता
    पढ़कर मुझे स्मृति दीदी की लिखी पंक्तियाँ याद आ गई
    वो कुछ यूँ है
    जब तुमने...
    जब सोचा था तुमने
    दूर कहीं मेरे बारे में
    यहां मेरे हाथों की चु‍ड़‍ियां छनछनाई थी।

    जब तोड़ा था मेरे लिए तुमने
    अपनी क्यारी से पीला फूल
    यहां मेरी जुल्फें लहराई थी।
    स्मृति जोशी "फाल्गुनी"

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  4. पूछ न ले कोई सबब इनके खनकने का,
    मैं इनको जितना थामती हूँ...
    नही मानती मेरी बे-धड़क
    शोर मचा रही है,
    मेरे हाथो की ये चूड़ियाँ
    न जाने क्या गुनगुना रही है.....

    चूड़ियों को माध्यम बनाती अतर्वेदना बहुत ही सुन्दर

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  5. बहुत खूबशूरत रचना............

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  6. bahut hi sunder,bhavpurn geet likha hein.
    har ek line mein bahut kuch hein..
    excellent....

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  7. bahut hi sunder n bhavpurn rachna,
    harek line mein bahut kuch hein.
    excellent work.....
    thnx for sharing..

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  8. बहुत ख़ूब!
    आपकी यह सुन्दर प्रविष्टि कल दिनांक 17-12-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-1082 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

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  9. चूड़ियों की खनक और उनकी याद ... सुंदर प्रस्तुति

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  10. वाह चूड़ियों की खनक बहुत सुन्दर भाव पिरोये हैं.

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  11. सुषमा जी ... ये प्रस्तुती बेहद लाजवाब है .. "मेरी हाथो से है लिपटी,
    एहसास तुम्हारा दिला रही है....." वाह ...
    मेरी नई कविता आपके इंतज़ार में है: नम मौसम, भीगी जमीं ..

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  12. आज भी तुम्हारी उँगलियों की छुअन से,
    मेरी चूड़ियाँ शरमा रही है...

    ओये होये बहुत ही मधुर अहसासों से लबरेज़ प्रस्तुति है ………सीधा दिल मे उतर गयी :)

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  13. खुबसूरत प्रणय रचना!

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  14. पूछ न ले कोई सबब इनके खनकने का,
    मैं इनको जितना थामती हूँ...
    नही मानती मेरी बे-धड़क
    शोर मचा रही है,
    मेरे हाथो की ये चूड़ियाँ
    न जाने क्या गुनगुना रही है.....

    चूड़ियों को माध्यम बनाती अतर्वेदना बहुत ही सुन्दर
    बहुत सराहनीय प्रस्तुति. आभार. बधाई आपको

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  15. बहुत खूब सुषमा जी


    सादर

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  16. sundar rachna...bahut bahut badhai..

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  17. हाथों की ये चूढ़ियाँ, जब करती हैं शोर।
    सुन कर इस संगीत को, नाचे मन का मोर।।

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  18. चूड़ियाँ मन की भाषा बोलती हैं ...बहुत सुन्दर अहसास... शुभकामनायें

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  19. दिल के भावों को व्यक्त करती सुन्दर रचना ।

    मेरी नई पोस्ट-गम लिया करते हैं

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  20. चूडियों की खनक में उनके गीत ...
    दिल के भावों को व्यक्त करती सुन्दर पोस्ट ...

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  21. सुन्दर रचना !

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  22. रंग बिरंगी ये चूड़ियाँ बहुत सुन्दर लगीं।

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  23. http://www.parikalpnaa.com/2012/12/blog-post_5341.html

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  24. बहुत खूबसूरत पंक्तियाँ ...आभार

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  25. अति सुन्दर मनमोहक रचना...
    लवली.....
    :-)

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  26. सुन्दर सी खनखनाती हुई कविता |

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  27. सुंदर प्रस्तुति....

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  28. मनोभावों की सुन्दर अभिव्यक्ति |बहुत भावपूर्ण रचना |

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  29. प्रेम से सराबोर सुंदर प्रस्तुति।।

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  30. चूड़ियों में बसे प्रेम को सुंदरता से रचा है ....
    बहुत खूब !

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  31. बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना...

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  32. बिम्‍बों का सुन्‍दर प्रयोग, वाह.

    आरंभ : चोर ले मोटरा उतियइल

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  33. बहुत खूबसूरत

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  34. wahhh...bahut achha likha hai apne...
    http://ehsaasmere.blogspot.in/

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  35. चूड़ियो पर खूबसूरत प्रस्तुति

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