Tuesday, 11 December 2012

मैं कहाँ शब्दों में बांध पायी हूँ......तुम्हे ......!!!

मैं कहाँ शब्दों में बांध पायी हूँ.......तुम्हे          
अब तक जितना भी लिख चुकी हूँ....तुम्हे
फिर भी अधुरा-अधुरा सा रहा है.....
अभी कहाँ पूरी तरह से जान पायी हूँ......तुम्हे
मैं कहाँ शब्दों में बांध पायी हूँ......तुम्हे

जब यकीन होता है कि,
तुमने अपना मान लिया है मुझे....
जब भी यकीन होता है कि,
मैंने जान लिया है........तुम्हे,
ये भ्रम भी टूटा है हर बार,
मैं कहाँ खुद में ढाल पायी हूँ.......तुम्हे 
मैं कहाँ शब्दों में बांध पायी हूँ......तुम्हे ......!!!

45 comments:

  1. बहुत सुन्दर एहसास.....
    प्यार बांधे नहीं बंधता.

    अनु

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  2. मैं कहाँ खुद में ढाल पायी हूँ.......तुम्हे
    मैं कहाँ शब्दों में बांध पायी हूँ......तुम्हे ......!!!

    गजब की अभिव्यक्ति :)
    मेरी नयी पोस्ट पर आपका स्वागत है  बेतुकी खुशियाँ

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  3. खुबसूरत अहसास...

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  4. आपकी इस उत्कृष्ट पोस्ट की चर्चा बुधवार (12-12-12) के चर्चा मंच पर भी है | जरूर पधारें |
    सूचनार्थ |

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  5. जब यकीन होता है कि,
    तुमने अपना मान लिया है मुझे....
    जब भी यकीन होता है कि,
    मैंने जान लिया है........तुम्हे,
    ये भ्रम भी टूटा है हर बार,
    मैं कहाँ खुद में ढाल पायी हूँ.......तुम्हे
    मैं कहाँ शब्दों में बांध पायी हूँ......तुम्हे ..

    कोशिश करिए ....लोग बंधेंगे एक ऐसे बंधन में जो कभी नहीं टूट पायेगा ये मेरा विश्वास है .

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  6. ये मार्स और वीनस वाले हमेशा एक दुसरे को समझने में लगे रहते हैं जबकि वस्तुतः वे एक-दूसरे के पूरक ही तो हैं...

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  7. मैं कहाँ खुद में ढाल पायी हूँ...तुम्हे..
    मैं कहाँ शब्दों में बांध पायी हूँ..तुम्हे..

    वाह ,,, बहुत उम्दा,लाजबाब कविता,,,शुसमा जी बधाई,,,

    recent post: रूप संवारा नहीं,,,

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  8. मैं कहाँ खुद में ढाल पायी हूँ.......तुम्हे
    मैं कहाँ शब्दों में बांध पायी हूँ......तुम्हे

    वाह ,,, बहुत उम्दा,लाजबाब कविता...सुषमा जी बधाई

    recent post: रूप संवारा नहीं,,,

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  9. बहुत सुन्दर रचना है |"मैंने जान लिया है तुम्हें -----"बहुत बढ़िया है |

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  10. सुषमा जी बेहद खूबसूरत प्रस्तुति

    अरुन शर्मा

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  11. ्बेहद खूबसूरत अहसास

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  12. अनुपम भाव संयोजित किये हैं आपने .. बेहतरीन अभिव्‍यक्ति

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  13. बहुत ही बढ़िया


    सादर

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  14. प्रेम के बंधन में बाँधने का सतत प्रयास बाँध लेगा अनजाने बंधन में उन्हें ...

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  15. बहुत ही शानदार........दिल को छूती पंक्तियाँ ।

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  16. ऐसी अनुभूतियां शब्दों में कहां बंध पाती हैं !
    प्रभावी रचना।

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  17. प्यार को दिल में कैद किया जा सकता है ,बाहर के बन्धनों से मुक्त....
    शुभकामनायें!

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  18. उन्मुक्त एहसास कभी सीमाओं में बांधे नहीं जा सकते. यही सच है. संदर रचना.

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  19. बहुत खूबसूरत अहसास

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  20. Madhu Singh,Benakab12 December 2012 at 11:11

    दिल को छूती पंक्तियाँ बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ****** जब यकीन होता है कि,
    तुमने अपना मान लिया है मुझे....
    जब भी यकीन होता है कि,
    मैंने जान लिया है........तुम्हे,
    ये भ्रम भी टूटा है हर बार,
    मैं कहाँ खुद में ढाल पायी हूँ.......तुम्हे
    मैं कहाँ शब्दों में बांध पायी हूँ......तुम्हे ......!!!

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  21. pehli bar aap ka blog padha - acha laga.

    kavitaye achi hai -**

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  22. सादर आमंत्रण,
    आपका ब्लॉग 'हिंदी चिट्ठा संकलक' पर नहीं है,
    कृपया इसे शामिल कीजिए - http://goo.gl/7mRhq

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  23. यह भ्रम टूटना आवश्यक है ताकि खुद के अंदर की किसी कमी को पहचाना जा सके और फिर से चेष्टा उसे पाने की जिसे शब्दों में बांधना सर्वथा असंभव है!!
    बहुत ही सुन्दर रचना!!

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  24. अगर शब्दों में बाँध पाते तो
    प्रेम शब्दों से छोटा होता ....
    बहुत मुश्किल है उसे शब्दों में बांधना सच में !

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  25. अगर शब्दों में बाँध पाते तो
    प्रेम शब्दों से छोटा होता ....
    बहुत मुश्किल है उसे शब्दों में बांधना सच में !

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  26. अच्छी रचना है ......

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  27. सुन्दर रचना

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  28. what a beautiful line..
    मैं कहाँ शब्दों में बांध पायी हूँ......तुम्हे
    thnx for sharing..

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  29. मैं कहाँ खुद में ढाल पायी हूँ.......तुम्हे
    मैं कहाँ शब्दों में बांध पायी हूँ......तुम्हे ......!!!

    भावपूर्ण लेखन. बहुत बधाई सुषमा जी.

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  30. एक प्यारी अभिव्यक्ति

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