Friday, 20 July 2012

इस बार झूम कर आया है....ये सावन.......!!!

ये बारिश से भीगा मौसम...                                             
और तुम्हारे प्यार से भीगा मेरा मन......
इस बार झूम कर आया है....ये सावन.......

कुछ मैंने की थी ख्वाइश,
कुछ बूंदों ने कि है साजिश......
मैं तुझमे खो जाऊ,
यही सावन कि रही है कोशिश......

खूब मन को भाया है....ये सावन....
इस बार झूम कर आया है सावन..
......

34 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति ||
    बधाई ||

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  2. फिर भीगिये...जी भर के...........
    :-)

    अनु

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  3. रिमझिम गिरे सावन....सुलग सुलग जाये मन..सुंदर कविता...

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  4. कुछ मैंने की थी ख्वाइश,
    कुछ बूंदों ने कि है साजिश......
    मैं तुझमे खो जाऊ,
    यही सावन कि रही है कोशिश......

    आपकी ख्वाइश और बूंदों की साजिश दोनों ही अच्छी है ...
    बेहतरीन भाव !

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  5. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (21-07-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  6. रिमझिम बारिश ऐसी आई, भीगा मोरा मन
    ऐसेमें तोरी याद सतावे ,झूमके आया सावन,,,,,,,

    बहुत सुंदर रचना,,,,,,

    RECENT POST ...: आई देश में आंधियाँ....

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  7. बहुत सुन्दर झूम के आया आपके ब्लॉग..और तासीर देख कर तो पूरा शमा बांध गया है..सुन्दर पंक्तियाँ

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  8. बस यूं ही एहसास होता रहे और सावन झूम कर बरसता रहे

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  9. सुंदर चित्र...रिमझिम फुहार.. बेहतरीन प्रस्‍तुति।

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  10. वैरी रोमांटिक...मज़ा आ गया कविता पढ़ के!!

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  11. सुंदर प्रस्तुति :

    मन तो उसके प्यार में भीग रहा है
    सावन अपना बीच में झूम रहा है !!

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  12. बहुत खूबसूरत रचना..बहुत..

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  13. खूब मन को भाया है....ये सावन....
    इस बार झूम कर आया है सावन....
    इसीलिए तो सावन को मनभावन कहा गया है न ... अनुपम भाव

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  14. खूब मन को भाया है....ये सावन....vakayee.....

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  15. सावन की ये मस्त फुहार ....सुन्दर पोस्ट।

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  16. यह बारिश भी कितनी अपनी है ....जैसा चाहो वैसा करती है ...खुश हो तो भिगोती है तन मन और दुःख हो तो साथ रोती है

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  17. रिमजिम सावन ने तो हमें भीगा ही दिया सुषमा जी..बहुत सुन्दर..

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  18. फिर भूली-बिसरी यादें
    वापस लाया सावन ...
    मुबारक हो !

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  19. बहुत खूबसूरत चित्र उससे भी सुन्दर प्रस्तुति

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  20. कुछ मैंने की थी ख्वाइश,
    कुछ बूंदों ने कि है साजिश......
    मैं तुझमे खो जाऊ,
    यही सावन कि रही है कोशिश......

    बारिस में तन ही नहीं मन भी भीग गया

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  21. सुन्दर प्रस्तुति

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  22. कुछ मैंने की थी ख्वाइश,
    कुछ बूंदों ने कि है साजिश......
    मैं तुझमे खो जाऊ,
    यही सावन कि रही है कोशिश......
    बहुत सुन्दर सावन में भीगी
    खुबसूरत रचना..:-)

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  23. Aaya sawan jhoom ke....jhoom kar aaya hai sawan

    Sundar panktiyaan

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  24. वाह ... सावन की बूँदें कितना असर रखती हैं ... मन के साथ मिल के साजिश करती हैं ...

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  25. खूब मन को भाया है....ये सावन....
    इस बार झूम कर आया है सावन........

    हर वर्ष ऐसे ही आता रहे सावन ..

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  26. सावन के मौसम में भींगी भींगी रचना आभार ......

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  27. इस बार झूम कर आया है सावन........
    वाह! सुंदर रचना.....
    सावन तो चला गया पर सावन की फुहारें अभी भी इधर झूम रही हैं...
    7 दिन बाद अभी क्षण भर को सूर्य देव झाँके और फिर भाग गए...
    सादर।

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