Tuesday, 8 May 2012

सिर्फ तुम्हारी हूँ....!!!

ना जाने कितनी बाते करनी होती है तुमसे.....              
कहना था की मुझे कुछ मिले न मिले...
लेकिन जिन्दगी के हर मोड़ पर..
तुम मेरे साथ रहना..
सिर्फ तुम्हारे इक साथ के लिए
मैं अपनी हर ख़ुशी,हर ख्वाइश छोड़ दूंगी,
मेरे लिए कभी भी तुम्हारा,
ये प्यार कम ना हो.....
मैं सच में वैसी नही हूँ...
शायद तुम्हारी कल्पनाओं,
जैसी भी नही हूँ...
फिर भी जैसी भी हूँ... 
सिर्फ तुम्हारी हूँ....

दिल से बहुत जुड़ते है रिश्ते...
मैंने अपनी भावनाओं,
अपने सपनो को.... 
अपनी ख़ुशी को जोड़ दिया है तुमसे.....
कुछ नही हूँ तुम्हारे बिना....
अपनी पहचान को भी तुमसे ही जोड़ा है.... 
अब जैसी भी हूँ... जो भी हूँ.. सिर्फ तुम्हारी हूँ....   

32 comments:

  1. लफ्जों की खूबसूरती छन-छन के निखर आई है...बहुत खूब!

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  2. मन को छूती, उद्वेलित करती कविता.. बहुत सुन्दर...

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  3. शब्दों के साथ चित्र कविता को बहुत खूबसूरती से स्पष्ट कर रहा है।

    सादर

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  4. बहुत ही सुन्दर रचना....
    जो भी हूँ जैसी भी हूँ सिर्फ तुम्हारी हु.....
    बहुत ही गहरी है ये पंक्तिया ..
    अपनत्व दर्शाती बहुत ही सुन्दर रचना,,,,,

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  5. मन को छूती हुई सुन्दर रचना...

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  6. समर्पित प्रेम की बहुत सुन्दर और भावपूर्ण अभिव्यक्ति....

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  7. मैं सच में वैसी नही हूँ...
    शायद तुम्हारी कल्पनाओं,
    जैसी भी नही हूँ...
    फिर भी जैसी भी हूँ
    सिर्फ तुम्हारी हूँ

    बहुत बहुत बहुत सुन्दर

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  8. prem aur apnapan ki gahri abhivyakti -------bahut sundar rachna ----

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  9. सुंदर समर्पण ...भाव प्रबल रचना ...!!
    शुभकामनायें ...!!

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  10. शायद तुम्हारी कल्पनाओं,
    जैसी भी नही हूँ...
    फिर भी जैसी भी हूँ...
    सिर्फ तुम्हारी हूँ....
    बहुत सुन्दर

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  11. सिर्फ तुम्हारी हूँ इसलिए चाहती हूँ तुम भी मेरे रहो...सिर्फ मेरे...........

    बहुत सुंदर सुषमा जी.

    अनु

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  12. दिल से बहुत जुड़ते है रिश्ते...
    मैंने अपनी भावनाओं,
    अपने सपनो को....
    अपनी ख़ुशी को जोड़ दिया है तुमसे.....
    कुछ नही हूँ तुम्हारे बिना....
    अपनी पहचान को भी तुमसे ही जोड़ा है....
    अब जैसी भी हूँ... जो भी हूँ.. सिर्फ तुम्हारी हूँ..
    KHUBSURAT AIHASAAS.

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  13. जैसी भी हूं...
    सिर्फ तुम्हारी हूं....

    बहुत भाग्यवान है वह पुरुष , जिसके लिए कहा गया है यह !
    … क्या कुछ नहीं है इस कथन में …


    सुषमा 'आहुति' जी
    नमस्कार !

    आपकी कविताओं में बिना आडंबर के सादगी भरा समर्पण भाव होता है , जो मुझे छू जाता है …

    निस्वार्थ प्रेम भाव रचनाओं में आता रहे…
    सदा !
    सर्वदा !
    चिर काल तक !
    अनंत काल तक !

    आभार एवं साधुवाद !!

    हार्दिक शुभकामनाएं !
    मंगलकामनाओं सहित…

    -राजेन्द्र स्वर्णकार

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  14. अब जैसी भी हूँ... जो भी हूँ.. सिर्फ तुम्हारी हूँ....समर्पण ही प्यार है .

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  15. दिल से बहुत जुड़ते है रिश्ते...
    मैंने अपनी भावनाओं,
    अपने सपनो को....
    अपनी ख़ुशी को जोड़ दिया है तुमसे.....

    प्रेम समर्पण है .....इस भाव की बेहतर अभिव्यक्ति इस रचना में हुई है ...!

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  16. bahut hee khoobsoorat ehsaas mein piroyi hui ye rachna!!

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  17. प्रेम और समर्पण से भरी सुन्दर रचना...

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  18. मैं सच में वैसी नही हूँ...
    शायद तुम्हारी कल्पनाओं,
    जैसी भी नही हूँ...
    फिर भी जैसी भी हूँ...
    सिर्फ तुम्हारी हूँ....
    bhut sundar

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  19. इस साथ में ही है जीवन की साँसें ...

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  20. आमीन ... ये रिश्ते यूं ही जुड़े रहें ... प्रेम की बयार बहती रहे ...
    मधुर रचना प्रेम मे पगी ...

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  21. समर्पण की शानदार रचना

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  22. मैं सच में वैसी नही हूँ...
    शायद तुम्हारी कल्पनाओं,
    जैसी भी नही हूँ...
    too gud....

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  23. प्रेम ऐसा ही समर्पण मांगता है बहुत सुन्दर पोस्ट।

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  24. मैं सच में वैसी नही हूँ...
    शायद तुम्हारी कल्पनाओं,
    जैसी भी नही हूँ...
    फिर भी जैसी भी हूँ...
    सिर्फ तुम्हारी हूँ....very nice....

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  25. प्रेम और प्रभु...ऐसा ही समर्पण माँगते हैं...

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  26. पूर्ण समर्पण के भाव ...सुंदर अभिव्यक्ति

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  27. पूर्ण समर्पण की यही तो पहचान है...

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  28. बहुत ही सुन्दर और हृदयस्पर्शी रचना !

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  29. samarpan mein khushi hai

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  30. sabhi kavitayein bahut hi sundar hain.....achcha laga par kar.........

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  31. bahut hi sundar rachna hai........

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