Monday, 26 December 2011

एक नया रूप धर कर.........2012

                                
                           हर साल की तरह ये साल भी गुज़र गया,                                       कुछ दिल में  सिमट गया तो कुछ टूट कर बिखर गया...
कभी तो लगा की एक पल में साल गुज़र गया....
तो कभी इस साल के इक-इक पल को,
गुजरने में सदिया गुज़र गयी......

यूँ लगा की बहुत कुछ कहना सा बाकी रह गया,
वक़्त बंद मुट्ठी में रेत की तरह गुज़र गया...
पूरा साल गम और खुशी को संजोती और समेटती रही,
जो संजो न पायी वो मेरे शब्दों में बिखर गया...
कभी ठहरा हुआ सा लगा,
तो कभी दौड़ता हुआ ये साल गुज़र गया......

क्या खोया क्या पाया?
इसी कशमकश ये वक़्त.....पूरा साल गुज़रता गया.....
हम क्यों उदास होते है ये सोच कर कि,
जिन्दगी का एक साल बीत गया 
जब कि वक़्त कभी बीतता नही.....
वो तो हममे जीता है एक नया रूप धर कर..........!!!


67 comments:

  1. यूँ लगा की बहुत कुछ कहना सा बाकी रह गया,
    वक़्त बंद मुट्ठी में रेत की तरह गुज़र गया...
    पूरा साल गम और खुशी को संजोती और समेटती रही,
    जो संजो न पायी वो मेरे शब्दों में बिखर गया...
    कभी ठहरा हुआ सा लगा,
    तो कभी दौड़ता हुआ ये साल गुज़र गया......सामने नया साल है, जो अनकहा रहा - कह लो , रफ़्तार तो बनी रहेगी

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  2. जिन्दगी का एक साल बीत गया
    जब कि वक़्त कभी बीतता नही.....
    वो तो हममे जीता है एक नया रूप धर कर..........!!!

    ...सच कहा है वक़्त हमेशा जीतता है एक नया रूप रख कर और इसी तरह वक़्त निकलता रहता है...बहुत सुंदर अभिव्यक्ति...नव वर्ष के लिये हार्दिक शुभकामनायें!

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  3. पूरा साल गम और खुशी को संजोती और समेटती रही,
    जो संजो न पायी वो मेरे शब्दों में बिखर गया...
    कभी ठहरा हुआ सा लगा,
    तो कभी दौड़ता हुआ ये साल गुज़र गया......very nice....

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  4. vaah aapne to naye saal ka shankhnaad se swagat bhi kar diya.bahut behtreen likha hai.

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  5. क्या खोया क्या पाया?
    इसी कशमकश ये वक़्त.....पूरा साल गुज़रता गया.....
    हम क्यों उदास होते है ये सोच कर कि,
    जिन्दगी का एक साल बीत गया
    जब कि वक़्त कभी बीतता नही.....
    वो तो हममे जीता है एक नया रूप धर कर..........!!!
    एक नए वर्ष की नयी आहट पर विचारों को को प्रेरित करने वाली रचना है ....आभार सुषमा जी | मै तो बस इतना कहना चाहूँगा -
    ग़मों के दौर को बस दिल से हटाये तेरा ख़याल |
    होठो पे तब्बसुम की लहर लाये नया साल ||

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  6. जिन्दगी का एक साल बीत गया
    जब कि वक़्त कभी बीतता नही.....
    वो तो हममे जीता है एक नया रूप धर कर..........!!!
    शत प्रतिशत सहमत आपसे बहुत सुंदर भाव बधाई

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  7. गहरी अभिव्‍यक्ति।

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  8. बहुत ही सुन्दर शब्दों सुन्दर सा वर्णन वक़्त की रफ़्तार का...

    यूँ लगा की बहुत कुछ कहना सा बाकी रह गया,
    वक़्त बंद मुट्ठी में रेत की तरह गुज़र गया...
    पूरा साल गम और खुशी को संजोती और समेटती रही,
    जो संजो न पायी वो मेरे शब्दों में बिखर गया...

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  9. बहुत ही सुन्दर शब्दों सुन्दर सा वर्णन वक़्त की रफ़्तार का...

    यूँ लगा की बहुत कुछ कहना सा बाकी रह गया,
    वक़्त बंद मुट्ठी में रेत की तरह गुज़र गया...
    पूरा साल गम और खुशी को संजोती और समेटती रही,
    जो संजो न पायी वो मेरे शब्दों में बिखर गया...

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  10. बहुत सुंदर रचना,...अच्छी प्रस्तुती,

    मेरे पोस्ट के लिए--"काव्यान्जलि"--बेटी और पेड़-- मे click करे

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  11. क्या खोया क्या पाया?
    इसी कशमकश ये वक़्त.....पूरा साल गुज़रता गया.....
    हम क्यों उदास होते है ये सोच कर कि,
    जिन्दगी का एक साल बीत गया
    जब कि वक़्त कभी बीतता नही.....
    वो तो हममे जीता है एक नया रूप धर कर..........!!!
    bahut umda shusma ji or apko nav vars ki haardik shubhkamnaye.........

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  12. क्या खोया क्या पाया?
    इसी कशमकश ये वक़्त.....पूरा साल गुज़रता गया.....
    हम क्यों उदास होते है ये सोच कर कि,
    जिन्दगी का एक साल बीत गया
    जब कि वक़्त कभी बीतता नही.....
    वो तो हममे जीता है एक नया रूप धर कर..........!!!
    bahut umda shusma ji or apko nav vars ki haardik shubhkamnaye.........

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  13. क्या खोया क्या पाया?
    इसी कशमकश ये वक़्त.....पूरा साल गुज़रता गया.
    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति...नव वर्ष के लिये हार्दिक शुभकामनायें!

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  14. Bahut khoob kaha apne, naya sal sabhi ke liye apar khushiya laye!

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  15. बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।

    कल 28/12/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्‍वागत है, कौन कब आता है और कब जाता है ...

    धन्यवाद!

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  16. जिन्दगी का एक साल बीत गया
    जब कि वक़्त कभी बीतता नही.....
    वो तो हममे जीता है एक नया रूप धर कर.........वाह ……क्या बात कही है……………

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  17. सुन्दर शब्द और भाव संयोजन....
    आगामी नए वर्ष की सादर बधाईयां.

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  18. वक़्त के साथ हम भी तो बीत ही जाते है ..

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  19. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    चर्चा मंच-741:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

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  20. बहुत सुंदर...
    शुभकामनाएं...नव वर्ष के लिए...

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  21. क्या खोया क्या पाया?
    शायद यह शाश्वत प्रश्न है

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  22. हाँ सही बात है इस मनन कि क्या खोया क्या पाया साल के अंत में......सुन्दर|

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  23. वक़्त उधार नहीं रखता कभी मुस्कराहट का जवाब मुस्कराहट से देता है...
    खुबसूरत रचना....

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  24. सुन्दर प्रस्तुति ...नववर्ष की शुभकामनाएं

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  25. बात हुवा साल यादें बन के जीता अहि हमारे अंदर ... सही कहा है .. आपको नव वर्ष २०१२ की मंगल कामनाएं ..

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  26. सुंदर स्वागत । नववर्ष के आगमन पर आपको भी बहुत बहुत शुभकामनाएं

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  27. achchi rachna...happy new year
    welcome to my blog :)

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  28. बहोत अच्छी प्रस्तुती ।

    आपको मेरी तरफ़ से नये साल के ढेंरो बधांइयां ।

    नया हिंदी ब्लॉग
    हिन्दी दुनिया ब्लॉग

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  29. Pahlee baar padha aapko! Behad sundar!
    Naye saal kee anek shubh kamnayen!

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  30. बहुत सुन्दर ......नव वर्ष की शुभकामनाएँ

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  31. बहुत खूब. सुंदर रचना. आभार.

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  32. अच्‍छी प्रस्‍तुति
    ।नव वर्ष की शुभकामनायें.
    vikram7: आ,मृग-जल से प्यास बुझा लें.....

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  33. बहुत सुन्दर प्रस्‍तुति|
    नव वर्ष की शुभकामनायें|

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  34. नव वर्ष के उपलक्ष्य में आप ने बहुत ही बेहतरीन लिखा आहुति जी,आप को नव वर्ष की खूब सारी बधाइयां ....:) :)

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  35. अच्छी प्रस्तुति |
    नव वर्ष शुभ और मंगलमय हो |
    आशा

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  36. बेहतरीन प्रस्तुति । मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है । . नव वर्ष -2012 के लिए हार्दिक शुभ कामनाएँ ।

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  37. बेहतरीन प्रस्तुति । मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है । . नव वर्ष -2012 के लिए हार्दिक शुभ कामनाएँ ।

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  38. शब्द जैसे ढ़ल गये हों खुद बखुद, इस तरह कविता रची है आपने।

    .......नववर्ष आप के लिए मंगलमय हो

    शुभकामनओं के साथ
    संजय भास्कर
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com/

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  39. नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें !

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  40. आपको और आपके परिवारजनों को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ.

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  41. HAARDIK SUBHKAMNAYE HAR PAL KHUSHNUMA HO....
    AAPKI MUSKAAN PE IS 2012 KO bHI GUMAAN ho...

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  42. वाह! बहुत सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति है आपकी.

    नववर्ष की आपको बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएँ.

    समय मिलने पर मेरे ब्लॉग पर आईयेगा,सुषमा जी.

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  43. यूँ लगा की बहुत कुछ कहना सा बाकी रह गया,
    वक़्त बंद मुट्ठी में रेत की तरह गुज़र गया...
    पूरा साल गम और खुशी को संजोती और समेटती रही,
    जो संजो न पायी वो मेरे शब्दों में बिखर गया...
    bahut badhiya

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  44. प्रस्तुति अच्छी लगी । मेरे नए पोस्ट पर आप आमंत्रित हैं । नव वर्ष की अशेष शुभकामनाएं । धन्यवाद ।

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  45. आप को सपरिवार नव वर्ष 2012 की ढेरों शुभकामनाएं.

    इस रिश्ते को यूँ ही बनाए रखना,
    दिल मे यादो क चिराग जलाए रखना,
    बहुत प्यारा सफ़र रहा 2011 का,
    अपना साथ 2012 मे भी इस तहरे बनाए रखना,
    !! नया साल मुबारक !!

    आप को सुगना फाऊंडेशन मेघलासिया, आज का आगरा और एक्टिवे लाइफ, एक ब्लॉग सबका ब्लॉग परिवार की तरफ से नया साल मुबारक हो ॥


    सादर
    आपका सवाई सिंह राजपुरोहित
    एक ब्लॉग सबका

    आज का आगरा

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  46. जो सँजो न पाई वो मेरे शब्दों में विखर गया।
    सुन्दर अभिव्यक्ति। नये वर्ष की शुभकामनाओं के साथ....

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  47. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति...नव वर्ष के लिये हार्दिक शुभकामनायें!

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  48. नव वर्ष मंगलमय हो !
    बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएं ....

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  49. आपको एवं आपके परिवार के सभी सदस्य को नये साल की ढेर सारी शुभकामनायें !

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  50. जब कि वक़्त कभी बीतता नही.....
    वो तो हममे जीता है एक नया रूप धर कर..........!!

    yahi sach..bakai satik rachna...

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  51. नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं,....

    नई रचना "काव्यान्जलि":

    नही सुरक्षित है अस्मत, घरके अंदर हो या बाहर
    अब फ़रियाद करे किससे,अपनों को भक्षक पाकर,

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  52. नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ ...

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  53. क्या बात है ! नववर्ष के लिए आपको शुभकामनाएं.

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  54. क्या खोया क्या पाया?
    इसी कशमकश ये वक़्त.....पूरा साल गुज़रता गया.....
    हम क्यों उदास होते है ये सोच कर कि,
    जिन्दगी का एक साल बीत गया
    जब कि वक़्त कभी बीतता नही.....
    वो तो हममे जीता है एक नया रूप धर कर..........!!!
    ...bilkul sahi kaha aapne.vqkt hamare samne naye nayee roop dhar kar hamare dware aa khada hota hai..
    sundar rachna...
    nav varsh ki aapko spariwar haardik shubhkamnayen!

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  55. तो कभी इस साल के इक-इक पल को,
    गुजरने में सदिया गुज़र गयी......
    और
    जो संजो न पायी वो मेरे शब्दों में बिखर गया...
    ये दोनों पंक्तियाँ बहुत पसंद आयीं |

    सादर

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