Thursday, 6 October 2011

नही बता पाउंगी की साँसे लेती हूँ कैसे...........!

तुम्हारे संग रहती हूँ ऐसे,                                           
दिया संग बाती हो जैसे....

तुमसे प्यार करती हूँ ऐसे,
सागर में बूंद रहती हैं जैसे....

तुम्हारा इंतज़ार करती हूँ ऐसे,
पिया के इंतज़ार में बरसो से
पपीहा पुकारती हो जैसे.....

तुम्हारे हर सफ़र पर साथ चलती हूँ ऐसे,
तुम संग परछाई रहती हो जैसे......

तुम्हे खुद में महसूस करती हूँ ऐसे,
दिल में धड़कने धड़कती है जैसे.....

तुम्हे कैसे बताऊ,
कि प्यार करती हूँ तुम्हे,
कितना और कैसे?
नही बता पाउंगी की साँसे लेती हूँ कैसे...........!

61 comments:

  1. बहुत ही बढ़िया।
    विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ।

    सादर

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  2. तुम्हे कैसे बताऊ, साँसे लेती हूँ कैसे...........!
    bahut achhi rachana....

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  3. बेहतरीन भावोभिव्‍यक्ति।
    शब्‍द चयन शानदार।
    शुभकामनाएं..... आभार......

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  4. nhi bta paungi sanse lati hun kaise....
    bhut khubsurat........

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  5. आपकी उत्कृष्ट रचना है --
    शुक्रवार चर्चा-मंच पर |
    शुभ विजया ||
    http://charchamanch.blogspot.com/

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  6. बहुत ही सुन्दर
    विजयादशमी पर हार्दिक शुभकामनाएं

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  7. सच में प्रेम ऐसा ही होता है ....जीवन से जुड़ा और जीवन का हर पहलु बन जाता है वह जो हमारे दिल में समाता है ...आपने इसी भावना को बहुत सशक्त तरीके से अभिव्यक्त किया है......आपका आभार

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  8. प्रेम की पराकाष्ठा है
    बहुत ही सुन्दर
    विजयादशमी पर हार्दिक शुभकामनाएं

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  9. भावपूर्ण रचना...शुभकामनाएँ|

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  10. खुबसूरत भाव भरी कविता
    विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएं

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  11. प्रेम पगी पंक्तियाँ मन को भा गयी .विजयदशमी की शुभकामनाये

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  12. बेहतरीन रचना,बधाई स्वीकार करें.

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  13. भावपूर्ण रचना.
    विजयादशमी पर आपको सपरिवार हार्दिक शुभकामनाएं.

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  14. तुमसे प्यार करती हूँ ऐसे,
    सागर में बूंद रहती हैं जैसे.......
    behtarin rachna...thanks for posting...

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  15. बहुत खूब शानदार लगी पोस्ट|

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  16. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति....
    विजयादशमी की सादर बधाईयां....

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  17. एक-एक शव्द मन को दोलायमान कर गए । मेरे पोस्ट पर आपका स्वागत है । धन्यवाद ।

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  18. बहुत सुन्दर रचनाएँ बधाई | सुषमा जी ६/११/२०११ को सुलतानपुर में सम्मान समारोह और कवि सम्मलेन है जरुर आइयेगा मैं हिमाचल से आ रहा हूँ |

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  19. bahut hi khubsurat rachna....
    jai hind jai bharart

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  20. कविता का भाव बहुत सुन्दर है । मनोभावों का खूबसूरत चित्रण ।

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  21. बहुत ही सुन्दर.. खूबसूरत चित्रण ।

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  22. waha...bahut khub surat abhivyakti...shabdo kii
    dil ke pyar kii.....

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  23. भावपूर्ण अभिव्यक्ति, बधाई

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  24. तुमसे प्यार करती हूँ ऐसे,
    सागर में बूंद रहती हैं जैसे....bahut .sundar.....

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  25. तुम्हे कैसे बताऊ,
    कि प्यार करती हूँ तुम्हे,
    कितना और कैसे?
    नही बता पाउंगी की साँसे लेती हूँ कैसे...........!

    मेरे पोस्ट पर आपका स्वागत है । धन्यवाद ।

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  26. माफ़ कीजियेगा सुषमा जी..........कविता में भाव अच्छे हैं.........परन्तु लयबद्धता में मुझे थोड़ी कमी लग रही हैं.........चाहे तो एक बार पुनरावृत्ति कर लें......

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  27. तुम्हारे संग रहती हूँ ऐसे,
    दिया संग बाती हो जैसे....

    तुमसे प्यार करती हूँ ऐसे,
    सागर में बूंद रहती हैं जैसे....

    तुम्हारा इंतज़ार करती हूँ ऐसे,
    पिया के इंतज़ार में बरसो से
    पपीहा पुकारती हो जैसे.....

    तुम्हारे हर सफ़र पर साथ चलती हूँ ऐसे,
    तुम संग परछाई रहती हो जैसे......
    बहुत ही सुन्दर सी कविता |

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  28. बहुत बढ़िया अभिव्यक्ति.

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  29. बहुत ही भाव पूर्ण रचना दिल को छू लेने वाले शब्द
    बधाई

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  30. बहुत बढ़िया अभिव्यक्ति

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  31. बहुत बढ़िया अभिव्यक्ति .

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  32. एक-एक शब्द.... सुन्दर बिम्ब प्रयोग....
    सार्थक रचना....बधाई...

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  34. तुम्हे कैसे बताऊ,
    कि प्यार करती हूँ तुम्हे,
    कितना और कैसे?
    नही बता पाउंगी की साँसे लेती हूँ कैसे...........!

    ...बहुत कोमल अहसास...सुन्दर भावमयी अभिव्यक्ति..

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  35. भावपूर्ण रचना

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  36. खूबसूरत शब्दों का सुंदर तानाबाना.
    सुन्दर प्रस्तुति.

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  37. मेरे ब्लॉग पर विसीट देने और अपनी पतिक्रिया देने के लिए बहोत बहोत धन्यवाद्, माफ़ी चाहता हूँ वैसे मेरा नाम adam नहीं है हरिओम शामकुवर है कुछ इलेक्ट्रिसिटी की प्रॉब्लम की वजह से गलती से वह नाम टाइप हो गया था, फिर से माफ़ी चाहता हूँ.आपके ब्लॉग की लगभग बहोत सारी सामग्री मैंने पढ़ी है बेहद ही उम्दा लेखक है आप, जिस तरह से आप शब्दों का जाल बुनकर आप कुछ लिखती है दिल की गहराइयो तक छू जाता है आपसे इसी प्रकार के लेखन की आशा रखता हूँ


    आज के लड़के और लड़किया facebook जैसी वेबसाइट पर अपने जिस तरह के चित्र प्रकाशित करते है वो काफी सर्मसार करने वालेहोते है होते है, जरा एक नज़र यहाँ भी डाले फेसबुक प्रोफाइल चित्र

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  38. बेहतरीन अभिव्यक्ति !
    शुभकामनायें आपको !

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  39. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति

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  40. बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।

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  41. बहुत कोमल अहसास......

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  42. खूबसूरत प्रेम-अभिव्यक्ति.पार्श्व संगीत ने सौंदर्य में वृद्धि कर दी.

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  43. तुम्हारा इंतज़ार करती हूँ ऐसे,
    पिया के इंतज़ार में बरसो से
    पपीहा पुकारती हो जैसे.....
    bhut khub.

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  44. छोटे-छोटे प्रतीकों के माध्यम से प्यार को अभिवक्त करती कविता. सराहनीय.

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  45. तुमसे प्यार करती हूँ ऐसे,
    सागर में बूंद रहती हैं जैसे....

    preet ka sarwshresh udaaharan hai ye
    sirf pyar nahi ek dharm hai ye!!!

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  46. बहुत अच्छी रचना,बधाई!

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  47. बेहतरीन भावोभिव्‍यक्ति।

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  48. प्रेम का खूबसूरत चित्रण ... सुंदर

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  49. प्रेम पगी अति कोमल भाव समेटे कब्यांजलि ...शुभकामनायें !!

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  50. सुन्दर प्रेमगीत है आहुति जी.

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  51. प्रेमरस में सराबोर करती , संयोग की सुन्दर कविता

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  52. आपकी सुन्दर कविता पढ़कर एक फ़िल्मी गाना याद आया ,
    ' प्यार करते है हम तुम्हे इतना ,
    दो आँखे तो क्या ,
    दो जहाँ मे समाएँ ना जितना |'.
    बधाई हो |धन्यवाद |

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  53. nahi bata paongi ki saas leti hoon kaise.... in
    shbdo ke liye mere paas shabd nahi hai..

    bahut hi khubsurat rachna...

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  54. bahut sunder rachna.
    aap mere blog par aayi apka dhanyvaad..

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