Monday, 12 September 2011

तुम्हारे लिए वो प्यार है.....!!

होगी तुम्हारे लिए यह मेरी लिखी
सिर्फ यह एक कविता,
मेरे लिए तो यह शब्दों में जो समेट कर रखा है
तुम्हारे लिए वो प्यार है.....

जिसका हर शब्द तुम्हे पुकारता है,   
जिसकी हर एक पंक्ति,
तुम्हारे एहसासों की गवाही देती है... 
सिर्फ तुम ही नही देख पाते हो!
वरना सभी को मेरी हर कविता में,
तुम्हारी छवि दिखाई देती है...

होगी तुम्हारे लिए मेरी कविताये
कागज़ में लिखी चंद पंक्तिया...
मेरे लिए यह मेरी धड़कने है,
सिर्फ तुम ही नही सुन पाते हो!
वरना सभी को हर पंक्ति में,
मेरी धडकने सुनाई देती है...

होगी तुम्हारे लिए यह कविता,
मेरी कल्पनाओं,मेरे ख्यालो में
लिखी कुछ पंक्तिया..
मेरे लिए यह भावनाओं,एहसासों से
पिरोयी हर एक पंक्ति है...
सिर्फ तुम ही नही समझ पाते हो इसकी गहरायी!
वरना हर किसी को मेरी हर पंक्ति में
प्यार की सच्चाई दिखाई देती है....

43 comments:

  1. मेरे लिए यह भावनाओं,एहसासों से
    पिरोयी हर एक पंक्ति है...
    सिर्फ तुम ही नही समझ पाते हो इसकी गहरायी!
    वरना हर किसी को मेरी हर पंक्ति में
    प्यार की सच्चाई दिखाई देती है....!


    प्यार के अनमोल भावों को आपने जिन शब्दों में अभिव्यक्त किया है सच में वह सराहनीय हैं .....आपके हर शब्द में हर किसी को प्रेम दिखाई देता है लेकिन जिसे आप प्रेम करते हो उसे नहीं?.....जीवन भी क्या विरोधाभास है ....सुंदर कल्पना मनभावन रचना .....!

    ReplyDelete
  2. होगी तुम्हारे लिए मेरी कविताये
    कागज़ में लिखी चंद पंक्तिया...
    मेरे लिए यह मेरी धड़कने है,
    सिर्फ तुम ही नही सुन पाते हो!
    वरना सभी को हर पंक्ति में,
    मेरी धडकने सुनाई देती है...
    wakai...

    ReplyDelete
  3. मेरे लिए तो यह शब्दों में जो समेट कर रखा है
    तुम्हारे लिए वो प्यार है.....
    वाह!! बहुत ही सुंदर .....

    ReplyDelete
  4. क्या बात है ......बेहतरीन।


    सादर

    ReplyDelete
  5. होगी तुम्हारे लिए यह कविता,
    मेरी कल्पनाओं,मेरे ख्यालो में
    लिखी कुछ पंक्तिया..
    मेरे लिए यह भावनाओं,एहसासों से
    पिरोयी हर एक पंक्ति है...
    बहुत हि शानदार पस्तुति

    ReplyDelete
  6. होगी तुम्हारे लिए मेरी कविताये
    कागज़ में लिखी चंद पंक्तिया...
    मेरे लिए यह मेरी धड़कने है,
    सिर्फ तुम ही नही सुन पाते हो!
    bahut khoobsoorat prastuti,badhai

    ReplyDelete
  7. अद्भुत... सुन्दर...
    एहसासों की गहराई को बहुत ही खूबसूरती से अभिव्यक्त किया है आपने
    बहुत ही सराहनीय रचना
    मैं इसे facebook पर शेयर कर रहा हूँ
    seeking pardon for sharing without permission...

    ReplyDelete
  8. वरना हर किसी को मेरी हर पंक्ति में
    प्यार की सच्चाई दिखाई देती है....

    बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

    ReplyDelete
  9. वो भी हर किसी में सम्मिलित है इसलिए इतने म्रदुल अहसासों को न समझे ऐसा हो ही नहीं सकता - एकतरफा समर्पण - बहुत सुंदर

    ReplyDelete
  10. खूबसूरत एहसास ... पर अफ़सोस जिसके लिए लिखी गयी वो ही अनजान है ..

    ReplyDelete
  11. सुषमा जी...खूबसूरत भावों से सजी एक सुन्दर रचना .बधाई !

    ReplyDelete
  12. मन के भावों को रचना में आपने बहुत खूबसूरती से बाँधा है!

    ReplyDelete
  13. bahut komal abhivyakti...

    सिर्फ तुम ही नही देख पाते हो!
    वरना सभी को मेरी हर कविता में,
    तुम्हारी छवि दिखाई देती है...

    shubhkaamnaayen.

    ReplyDelete
  14. बहुत खूबसूरत भाव अभिव्यक्ति..सुन्दर अह्सास..

    ReplyDelete
  15. गंभीर और कोमल एहसास से सजी हुई रचना ....

    ReplyDelete
  16. बहुत खुबसूरत अभिव्यक्ति ||

    ReplyDelete
  17. होगी तुम्हारे लिए मेरी कविताये
    कागज़ में लिखी चंद पंक्तिया...
    मेरे लिए यह मेरी धड़कने है,
    सिर्फ तुम ही नही सुन पाते हो!
    वरना सभी को हर पंक्ति में,
    मेरी धडकने सुनाई देती है...

    बहुत सुन्दर रचना | बधाई |

    मेरी नई रचना देखें-
    **मेरी कविता:राष्ट्रभाषा हिंदी**

    ReplyDelete
  18. very very nice....such kha
    prem dhundhta rhta h apne kdradano ko
    jo such pucho, prem ki koi manjil nhi hoti....

    ReplyDelete
  19. प्रेम-भाव-परिपूर्ण मनः स्थिति दर्शाती रचना..आभार

    ReplyDelete
  20. एक-एक शब्द भावपूर्ण ...
    संवेदनाओं से भरी बहुत सुन्दर कविता.

    ReplyDelete
  21. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति प्रेम की शब्दों का चयन अच्छा है ....

    ReplyDelete
  22. waah... prem mei doobi, prem se tript prem-paati...
    sundar...

    ReplyDelete
  23. एक शेर अर्ज़ है आपकी कविता पर ......बहुत सुन्दर लगी पोस्ट |

    "पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारे जाने है जाने न जाने
    वो गुल ही न जाने बाकी बाग़ तो सारा जाने है "

    ReplyDelete
  24. प्यार कभी तो नज़र आ ही जाता है ... उम्मीद का दामन पकडे रहना चाहिए ... लाजवाब रचना है आपकी ...

    ReplyDelete
  25. खूबसूरत एहसास...सुषमा जी

    ReplyDelete
  26. प्यार के अनमोल भाव.......

    ReplyDelete
  27. संवेदनाओं से भरी बहुत सुन्दर कविता|

    ReplyDelete
  28. शुरुआत से के हर शब्द से प्रेम झांक रहा है ... बेहद लाजवाब लिखा है आपने ... आप इस तरह लिखती रहे ..शुभकामनायें !!!!

    ReplyDelete
  29. प्रेमरस में आकंठ डूबी सुन्दर - चित्ताकर्षक कविता

    ReplyDelete
  30. होगी तुम्हारे लिए यह कविता,
    मेरी कल्पनाओं,मेरे ख्यालो में
    लिखी कुछ पंक्तिया..
    मेरे लिए यह भावनाओं,एहसासों से
    पिरोयी हर एक पंक्ति है...
    सिर्फ तुम ही नही समझ पाते हो इसकी गहरायी!
    वरना हर किसी को मेरी हर पंक्ति में
    प्यार की सच्चाई दिखाई देती है...अपनी रचना और अपनी कलम पर पूरा विश्वाश और बेहद प्यार को दर्शाती रचना बहुत ही खूबसूरत अहसास |
    सुन्दर रचना |

    ReplyDelete
  31. apni hi kavitao me ualajh jata hu
    jab tu nahi samjhti bhavo ko mere........

    atuyant bhavpurn kavita hai aapki....

    ReplyDelete
  32. होगी तुम्हारे लिए यह मेरी लिखी
    सिर्फ यह एक कविता,
    मेरे लिए तो यह शब्दों में जो समेट कर रखा है
    तुम्हारे लिए वो प्यार है.....bahut sundar ,.itna pyar .bus sabd nahi hai ,aapki rachnaoan ka ant nahi hai ,,,,

    ReplyDelete
  33. मेरे लिए यह भावनाओं,एहसासों से
    पिरोयी हर एक पंक्ति है...
    सिर्फ तुम ही नही समझ पाते हो इसकी गहरायी!
    वरना हर किसी को मेरी हर पंक्ति में
    प्यार की सच्चाई दिखाई देती है....

    मन को उद्वेलित करने वाली कविता....

    और साथ ही आपका संगीतमय बहुत सुंदर ब्लॉग ...

    हार्दिक शुभकामनायें।

    ReplyDelete
  34. सुंदर भावपूर्ण कविता...शुभकामनाएँ ।

    ReplyDelete
  35. बहुत सुन्दर भावपूर्ण अभिव्यक्ति..

    ReplyDelete
  36. होगी तुम्हारे लिए यह कविता,
    मेरी कल्पनाओं,मेरे ख्यालो में
    लिखी कुछ पंक्तिया..

    bahut khoobsurat

    hamare blog par apka intazaar rahega

    tanhaayaadein.blogspot.com

    ReplyDelete
  37. बहुत सुन्दर ...... इतनी टिप्पणी आने का आशय है कि आपका ब्लाग काफी लोगों तक पहुँचता है।

    ReplyDelete
  38. होगी तुम्हारे लिए मेरी कविताये
    कागज़ में लिखी चंद पंक्तिया...
    मेरे लिए यह मेरी धड़कने है,
    सिर्फ तुम ही नही सुन पाते हो!
    वरना सभी को हर पंक्ति में,
    मेरी धडकने सुनाई देती है...

    vaah bahut khoobsurat

    ReplyDelete
  39. नहीं कदाचित ये उतना सच नहीं.....पुरुष निश्चित रूप से स्त्री के प्रेम को समझता और सराहता है......बस भावनाए व्यक्त करने में थोड़ा कच्चा होता है......इसलिए उसके चेहरे पर ना जाएँ.......उसका अंतर विशाल और बहुत उदार होता है......

    ReplyDelete
  40. waah adbhut, bhavpurn....kya baat hai!!!

    Badhai

    www.poeticprakash.com

    ReplyDelete