Friday, 2 September 2011

तुम्हारे है.... !!!


कुछ मैंने लिख दिए हैं,
कुछ अधलिखे हैं,
वो सारे गीत तुम्हारे है...

कुछ ख्वाब मैंने देख लिए हैं,
कुछ अनदेखे हैं,
वो सारे सपने तुम्हारे हैं...

कुछ मैंने कह दी हैं,
कुछ अनकही सी हैं,
वो सारी बाते तुम्हारी हैं....

कुछ एहसासों को शब्द दिए है मैंने, 
कुछ एहसास निशब्द रह गए हैं,
वो सारे शब्द तुम्हारे हैं...

कुछ दिन बीत गए हैं तुम्हारी यादो के संग,
कुछ इंतजार के है,
वो सारे पल तुम्हारे हैं....
मेरी हर ख़ुशी तुमसे ही हैं,
मेरा आज,मेरा कल तुम्हारा हैं....!

65 comments:

  1. samarpan ka sunder bhaav ...
    bahut sunder rachna ..badhai..

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  2. कुछ दिन बीत गए हैं तुम्हारी यादो के संग,
    कुछ इंतजार के है,
    वो सारे पल तुम्हारे हैं....

    अपने मन की समर्पण की भावना को बहुत ही अच्छे शब्द दिये हैं आपने।

    सादर

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  3. very nice,......keep it up.

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  4. "मेरी हर ख़ुशी तुमसे ही हैं,
    मेरा आज,मेरा कल तुम्हारा हैं....!"


    "कुछ एहसासों को शब्द दिए है मैंने,
    कुछ एहसास निशब्द रह गए हैं,
    वो सारे शब्द तुम्हारे हैं..."

    बहुत सुंदर दिल के जज्बात पिरोए हें आपने अपनी कविता में हर शब्द जैसे दिल से निकल रहा हो !सुंदर भाव ...

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  5. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  6. कुछ ख्वाब मैंने देख लिए हैं,
    कुछ अनदेखे हैं,
    वो सारे सपने तुम्हारे हैं...

    बहुत प्यारे अहसासों को शब्द दिए है आपने
    बहुत बहुत बधाई

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  7. बहुत अच्छी रचना है,वाह.

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  8. वाह प्रेम और समर्पण की सुन्दर अभिव्यक्ति।

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  9. कुछ एहसासों को शब्द दिए है मैंने,
    कुछ एहसास निशब्द रह गए हैं,
    वो सारे शब्द तुम्हारे हैं...

    sunder abhivyakti..

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  10. कुछ एहसासों को शब्द दिए है मैंने,
    कुछ एहसास निशब्द रह गए हैं,
    वो सारे शब्द तुम्हारे हैं...

    खूबसूरत एहसास लिए सुन्दर रचना

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  11. बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

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  12. सारा समर्पण तुम्हारे लिये.

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  13. सुन्दर अहसासों से परिपूरित कोमल रचना...
    सादर...

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  14. समर्पित भावों से ओत-प्रोत रचना भाव-पूर्न बन पडी है.

    बधाई.

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  15. वो सारे शब्द तुम्हारे हैं...

    भावपूर्ण कविता.

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  16. premras se sarobar rachna...........

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  17. बहुत खूब ! समर्पित प्रेम की बहुत सुन्दर और भावपूर्ण प्रस्तुति...

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  18. Very very very nicely said.. :)

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  19. आप बहुत अच्छा लिखती हो दोस्त पढकर मज़ा आ जाता है | दुआ करुँगी ये कलम ऐसे ही चलती रहे |
    बहुत सुन्दर रचना |

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  20. OMG..OMG..OMG...
    thats the reaction I had after reading each line of this poem....Awesome work Sushma...you rock!!!

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  21. कुछ मैंने कह दी हैं,
    कुछ अनकही सी हैं,
    वो सारी बाते तुम्हारी हैं....
    आपकी यह कविता...सीधे दिल तक हर एहसास पहुंचा दे रही है...बधाई स्वीकार करें .

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  23. bahut sundar aahuti ji..sab kuchh samrpit kar dena ..yahi pyaar hai...

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  24. वो सारे शब्द तुम्हारे हैं..
    समर्पित भावों से ओत-प्रोत रचना

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  25. अच्छी कविता.......

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  26. सुषमा जी अभिवादन ..सार्थक रचना सुन्दर मूल भाव ..ये सुन्दर प्यार का अहसास बना रहे ...
    धन्यवाद
    भ्रमर ५

    "मेरी हर ख़ुशी तुमसे ही हैं,
    मेरा आज,मेरा कल तुम्हारा हैं....!"

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  27. मेरी हर ख़ुशी तुमसे ही हैं,
    मेरा आज,मेरा कल तुम्हारा हैं....!
    बहुत सुन्दर एहसास
    शुष्मा जी

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  28. मेरी हर ख़ुशी तुमसे ही हैं,
    मेरा आज,मेरा कल तुम्हारा हैं....!
    बहत सुन्दर एहसास हैं
    सुन्दर रचना के लिए बधाई

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  29. सुन्दर भावों से ओत-प्रोत बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

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  30. मेरी हर ख़ुशी तुमसे ही हैं,
    मेरा आज,मेरा कल तुम्हारा हैं....!
    बहुत सुन्दर एहसास .समर्पित भावों से ओत-प्रोत रचना.

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  31. कुछ एहसासों को शब्द दिए है मैंने,
    कुछ एहसास निशब्द रह गए हैं,
    वो सारे शब्द तुम्हारे हैं...

    बहुत सुन्दर रचना ,समर्पित भावों से ओत-प्रोत. बधाई

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  32. बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

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  33. समर्पित प्रेम की बहुत सुन्दर और भावपूर्ण प्रस्तुति|

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  34. प्रेम का नाम ही तो समर्पण है ...
    बहुत अच्छे भाव ...

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  35. खुबसूरत अभिव्यक्ति...

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  36. कुछ एहसासों को शब्द दिए है मैंने,
    कुछ एहसास निशब्द रह गए हैं,
    वो सारे शब्द तुम्हारे हैं...

    वाह !!! अतिसुंदर.

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  37. खूबसूरत एहसास लिए सुन्दर रचना

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  38. बहुत प्यारे अहसास......

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  39. तेरा तुझको अर्पण क्‍या लागे मेरा ....
    छ: शब्‍द ... सत्रह लाईनें. सामयिक भाव की इस सहज अभिव्‍यक्ति के लिए बहुत बहुत धन्‍यवाद आहुति जी.

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  40. may i grant the permission to share it on facebook?

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  41. अपना सब कुछ किसी को अर्पित कर देना भी एक सुखानुभूति है ... सुन्दर रचना है ...

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  42. बेहद खूबसूरत....


    अपने ब्लाग् को जोड़े यहां से 1 ब्लॉग सबका

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  43. कुछ एहसासों को शब्द दिए है मैंने,
    कुछ एहसास निशब्द रह गए हैं,
    वो सारे शब्द तुम्हारे हैं...

    Khoob... BAhut Umda Shabd Sanyojan...

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  44. khubsurat rachna... shabdon ka achha istemaal kiya hai...

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  45. प्रेम और समर्पण की सुन्दर अभिव्यक्ति...सुन्दर प्रस्तुति..

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  46. कुछ एहसासों को शब्द दिए है मैंने,
    कुछ एहसास निशब्द रह गए हैं,
    वो सारे शब्द तुम्हारे हैं...
    बहुत सुन्दर रचना एहसास....... सुन्दर

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  47. खूबसूरत अहसासों से लबरेज़!
    आशीष
    --
    मैंगो शेक!!!

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  48. मेरी हर ख़ुशी तुमसे ही हैं,
    मेरा आज,मेरा कल तुम्हारा हैं....!

    beautiful...

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  49. दिल को छू लिया कविता के शब्दों ने ...मन में कुछ कसक सी है

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  50. Aj pehli bar apki kavyarachnao se parichit hua, netra sthir se ho gaye inhe padhkar,
    really awesome

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  51. समर्पण पर इससे बेहतर अभिव्यक्ति और भला क्या हो सकती है.

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  52. मेरा आज मेरा कल तुम्हारा है।
    बहुत अच्छा।

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  53. आपको हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं आज हमारी "मातृ भाषा" का दिन है तो आज हम संकल्प करें की हम हमेशा इसकी मान रखेंगें...
    आप भी मेरे ब्लाग पर आये और मुझे अपने ब्लागर साथी बनने का मौका दे मुझे ज्वाइन करके या फालो करके आप निचे लिंक में क्लिक करके मेरे ब्लाग्स में पहुच जायेंगे जरुर आये और मेरे रचना पर अपने स्नेह जरुर दर्शाए..
    MADHUR VAANI कृपया यहाँ चटका लगाये
    BINDAAS_BAATEN कृपया यहाँ चटका लगाये

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  54. कुछ दिन बीत गए हैं तुम्हारी यादो के संग,
    कुछ इंतजार के है,
    वो सारे पल तुम्हारे हैं..बहुत सुन्दर अभीव्यक्ती सुषमा जी .....मेरे दीदी का नाम भी सुह्म है जो कानपूर में ही रहती है ..और मेरा जन्मस्थल भी कानपूर ही है

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  55. कुछ मैंने कह दी हैं,
    कुछ अनकही सी हैं,
    वो सारी बाते तुम्हारी हैं....

    सुन्दर रचना...!

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  56. बस इतना ही कहूँगा कि.......आलोचना के शब्द नहीं हैं मेरे पास.........

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  57. समर्पण के भाव को जीवंत करती रचना!

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