Sunday, 19 June 2011

ये बारिश की बूँदे....!!!

ये ठण्डी हवाये ये बारिश की बूँदे
जरा देखा इन्हे गौर से तो,
इनमे अक्स तुम्हारा दिखने लगा...!

इन हवाओ के साथ, 
तुम्हारे साथ बीती हुई अनछुई यादो का सिलसिला ,
बनके खुशबू मेरी सांसो मे घुलने लगा....!

 इन बूँदो का स्पर्श,
तुम्हारे प्यार का अहसास दिलाने लगी,
इक पल मुझे यूँ लगा कि
ये मौसम,ये फुहार
मुझे तुमसे मिलाने लगी...!


55 comments:

  1. भावनाओं की खूबसूरती शब्दों में देखते ही बन रही है.
    बेहतरीन कविता है.

    सादर

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  2. जरा देखा इन्हे गौर से तो,
    इनमे अक्स तुम्हारा दिखने लगा...!
    ऐसा ही होता है

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  3. her nanhin nahin bunden kuch kah jati hain kaanon me.......

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  4. बहुत खूबसूरत एहसास को समेटे अच्छी रचना ...

    शिलशिला को सिलसिला कर लें

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  5. baarish ki to bund bund mein romance racha basa hota hai..

    bahut khoob..

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  6. खूबसूरत कविता....

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  7. NO TEN UPASTHIT HAI MAM. . . . BAHUT PYARI LAGI APKI YE KAVITA. .
    JAI HIND JAI BHARAT

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  8. superb one
    i really like this poem
    check out mine blog also
    http://iamhereonlyforu.blogspot.com/

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  9. बहुत खुबसूरत अहसास .....प्यार में भीगे हुए.....सुभानाल्लाह |

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  10. कल 21/06/2011को आपकी एक पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की गयी है-
    आपके विचारों का स्वागत है .
    धन्यवाद
    नयी-पुरानी हलचल

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  11. मुझे तुमसे मिलाने लगी...!

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  12. बहुत सुंदर भाव और अभिव्यक्ति...
    पहली बार आपके ब्लॉग पर हूं अच्छा लगा....आप भी आइए....

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  13. great thought. congratulation.

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  14. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 21 - 06 - 2011
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

    साप्ताहिक काव्य मंच-- 51 ..चर्चा मंच

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  15. .मन की तड़प और बेचैनी को इससे बेहतर अंदाज़ में व्यक्त करना मुश्किल है.

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  16. सुँदर भावपूर्ण कविता .

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  17. भावपूर्ण अभिव्यक्ति।

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  18. आदरणीय सुषमा आहुति जी,
    यथायोग्य अभिवादन् ।

    बीते साथ को जब वक्त याद बनाकर अनछुआ बनाये रखने की जुर्रत जुटाये रखता है, तब निश्चित वह खुशबू सांसों में घुलती ही है? और बारिश में इसकी सौंधी महक सभी पढ़ लेते हैं। कामना है, अक्स यकीन में बदले।

    रविकुमार बाबुल
    ग्वालियर

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  19. बारिश की बूंदे और उनका एहसास ... रूमानी बना दिया है रचना को ..

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  20. ये मौसम,ये फुहार
    मुझे तुमसे मिलाने लगी...!भावपूर्ण कविता ...

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  21. इन हवाओ के साथ,
    तुम्हारे साथ बीती हुई अनछुई यादो का सिलसिला ,
    बनके खुशबू मेरी सांसो मे घुलने लगा....!

    kyaa baat hai....

    baarish ki bundon jaisi suhaani rimjhim rimjhim barastee rachna...

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  22. बारिश की बुंदों में सिमटी ताजगी लिए एक खुबसुरत रचना।

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  23. बहुत सुंदर अहसास मुबारक हो ...

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  24. बहुत सुन्दर रचना| धन्यवाद|

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  25. सावन की एक खूबी है....पिछली बातों को धो-पोंछ कर हमारे सामने लाकर खडा कर देता है ....इस खूबी को सुन्दर तरीके से प्रस्तुत किया है...

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  26. सुन्दर भाव की प्रस्तुति

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com
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  27. ये ठण्डी हवाये ये बारिश की बूँदे

    सुषमा जी बहुत सुन्दर रचना प्यार के रंग में सराबोर
    मै तो इसे कुछ इस तरह गाने गुनगुनाने लगा -कैसा लगा ???



    गौर फ़रमाया आँखें बरसने लगीं

    छंटे बादल वो काले

    दिल के धड़कन की यादें

    अक्स इनमें तुम्हारा वो दिखने लगा...!

    शुक्ल भ्रमर ५
    मन करता है दर्द से बचने दुनिया से कही और चला मै जाऊं

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  28. ये ठण्डी हवाये ये बारिश की बूँदे
    जरा देखा इन्हे गौर से तो,
    इनमे अक्स तुम्हारा दिखने लगा
    वो छोटी-2 बारिश की बूंदे मुझे अहसाश तुम्हारा दिलाने लगी
    जब पलट कर देखा तो बस खामोश रास्ता था जो फिर मुझे मेरे आसुओ की बारिश में भीगने लगा ...... ... बहुत सुन्दर,,,,

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  29. इन हवाओ के साथ,
    तुम्हारे साथ बीती हुई अनछुई यादो का सिलसिला

    Vah! Bahut badhiya!

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  30. बहुत प्यारी भाव पूर्ण रचना
    आशा

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  31. Barish ki boondein aisi hi hoti hain,
    kabhi chehre pe hansti hain,
    aur kabhi aankhon se roti hain....

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  32. जरा देखा इन्हे गौर से तो,
    इनमे अक्स तुम्हारा दिखने लगा...!
    लाली मेरे लाल की जित देखूं तित लाल ... समर्पण भाव में डूबी बेहतरीन रचना

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  33. मन के आंचल को भिगा गयीं ये मधुर काव्‍य की लघु बूंदें।

    ---------
    रहस्‍यम आग...
    ब्‍लॉग-मैन हैं पाबला जी...

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  34. khubsurat barish ki bunden..........:)

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  35. बारिश में भीगने का एहसास करा गयी ........ शुभकामनायें !

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  36. इन हवाओ के साथ,
    तुम्हारे साथ बीती हुई अनछुई यादो का सिलसिला ,
    बनके खुशबू मेरी सांसो मे घुलने लगा....!

    भावुक...
    सुन्दर...
    मर्मस्पर्शी भावाभिव्यक्ति....

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  37. खूबसूरत और नाजुक एहसासों को बखूबी समेत दिया है शब्दों में,वाह!!!!!!

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  38. अति सुंदर, दिल की गहराई छूने वाली रचना है

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  39. yaden aise hi bahanon se bar bar hamare samaksh prastut ho jati hain .bahut sundar rachna .

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  40. Anchhuye bhavo ko shabd deti sundar kavita

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  41. इन हवाओ के साथ,
    तुम्हारे साथ बीती हुई अनछुई यादो का सिलसिला ,
    बनके खुशबू मेरी सांसो मे घुलने लगा..

    dusri baar padhee, fir bhi achhi lagi.....

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  42. very nice poem................
    its really cool.
    very sentimental..............something beyond word.............well tied

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  43. सुषमाजी, आज दुबारा आपकी कविता पढ़ी और बिना कमेंट के जा नहीं सका। सचमुच बहुत अच्‍छा लिखा है आपने।

    बधाई।

    ---------
    विलुप्‍त हो जाएगा इंसान?
    कहाँ ले जाएगी, ये लड़कों की चाहत?

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  44. preet me bheege bheege bhavo kee sunder abhivykti.

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