Thursday, 30 June 2011

मेरे साथ चल कर देखना .....!!!

कभी जो वक़्त मिले तो
मेरे साथ चल कर देखना 
मेरे साथ इन टेढ़ी मेढ़ी राहो से गुज़र कर 
अपने हाथो में मेरा हाथ थाम कर
कुछ दूर सम्हल कर देखना....!

तुम्हारे ख्वाब,
तुम्हारी ख्वाइशे
मुझमे सब कुछ तुम्हारा ही है
एक बार अपने दिल को
मेरे दिल से बदल कर देखना...!
कभी जो वक़्त मिले तो
मेरे साथ चल कर देखना.......!!!

22 comments:

  1. अपने दिल को
    मेरे दिल से बदल कर देखना...!

    भावनाओं का सुन्दर प्रवाह |

    दोनों दिल बोले वाह-वाह |

    देते रहें दिल से हमेशा--

    दुनिया को सुन्दर सलाह ||

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  2. तुम्हारे ख्वाब,
    तुम्हारी ख्वाइशे
    मुझमे सब कुछ तुम्हारा ही है
    एक बार अपने दिल को
    मेरे दिल से बदल कर देखना...!waah

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  3. बहुत खूब
    कोमल भावो की प्यारी रचना

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  4. बहुत प्यारी रचना-वाह!

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  5. तुम्हारे ख्वाब,
    तुम्हारी ख्वाइशे
    मुझमे सब कुछ तुम्हारा ही है
    एक बार अपने दिल को
    मेरे दिल से बदल कर देखना...

    प्रेम की पराकाष्ट को छूती है रचना ... बहुत प्यारी रचना ..

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  6. तुम्हारे ख्वाब,
    तुम्हारी ख्वाइशे
    मुझमे सब कुछ तुम्हारा ही है

    waah seedhi baat dil se kahi gayi dil me utarti hui.

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  7. बहुत सुंदर. क्या बात है

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  8. कौन संभल सका है सुषमा जी हे प्रभु ये तो बड़ी मुश्किल का काम है -सुन्दर प्रेम की अभिव्यक्ति

    अपने हाथो में मेरा हाथ थाम कर
    कुछ दूर सम्हल कर देखना....!

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  9. शब्द-शब्द संवेदनाओं से भरी सुन्दर रचना ....

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  10. नए रास्तों पे चलना सफ़र की है शर्त वरना
    तेरे साथ चलने वाले तुझे अजनबी कहेंगे

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  11. sushma ji,
    bahut hee sundar gazal likhi hai aapne, padh kar mann prasann ho gaya!
    aapka follower ban gaya hoon to ab aataa rahungaa, agar aapke paas waqt ho to aaiyega mere ghar bhee.

    http://shayarichawla.blogspot.com/

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  12. सामंजस्य ही प्यार बढाती है !आस्था होनी चाहिए ! गूढ़ कविता !

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  13. aap buhut accha likhti hain ....... aap humesha isi prakar likhti rahen ......shubh kamnayen

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  14. तुम्हारे ख्वाब,
    तुम्हारी ख्वाइशे
    मुझमे सब कुछ तुम्हारा ही है
    एक बार अपने दिल को
    मेरे दिल से बदल कर देखना

    बहुत सुन्दर रचना सुषमा जी
    कभी हमारे ब्लॉग पर भी आगमन करे
    vikasgarg23.blogspot.com

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  15. डीयर सुषमा जी ,
    आपके लिखे एक एक शब्द ने मुझको अन्दर तक झिंझोड़कर रख दिया है लेकिन अगर आप दर्द की नदी है तो हम भी ...सॉरी मुझे तारीफ़ आपके कमाल के लेखन की करनी है जो आज के समय में दिखना असंभव सा हो गया है ...आपके शब्दों के चयन ने आपकी लेखनी को बेहद धारदार बना दिया है आप वाकई बधाई की पात्र है ....भगवान् आपकी हर सोची हुई हर इच्छा पूरी करें ....

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  16. सॉरी सुषमा जी मेरा मन आपके इस ब्लॉग को छोड़ने का नहीं कर रहा है आप मुझे माफ़ कर दें एक एक शब्द मुझे अपनी तरफ खींचते हुए सा लग रहा है लेकिन मजबूरी है सो भारी मन से ये पेज छोड़ रहा हूँ .....

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  17. आदरणीय सुषमा आहुति जी,
    यथायोग्य अभिवादन् ।

    जी... जब तमाम ख्वाब और ख्वाहिशें हों और यह दिल बदल जाता, तो कहना ही क्या? बेहतरीन रचना, साथ ले चलने पर मजबूर करती हैं...?

    रविकुमार बाबुल
    ग्वालियर

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  18. एक बार मेरे दिल को अपने दिल से बदल के देखना ।
    सामने दर्पण के जब तुम आओगे ,
    अपनी सीरत में मुझे ही पाओगे ।
    बहुत अच्छा माननी भाव लिए हैं ये पंक्तियाँ ,कह सकते हो राधा भाव ,कहीं भी गोपन नहीं ..

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  19. bahut hi sundar.. maza aa gaya padh kar..
    मेरी नयी पोस्ट पर आपका स्वागत है : Blind Devotion - सम्पूर्ण प्रेम...(Complete Love)

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