Saturday, 26 March 2011

जब भी लिखती हूँ मै...!!!


जब भी लिखती हूँ मै,
शब्द मेरे ख्याल तुम्हारा होता है,
 जब भी लिखती हूँ मै,
 सवाल मेरे जवाब तुम्हारा होता है..!

 जब भी लिखती हूँ मै,
 जो बात तुमसे कही नही अभी तक,
 वो बात वो प्यार मेरे शब्दो मेँ उभर जाता है,
 मै लिखती नही कोई कविता,
  तुम्हारा ख्याल कविता बन कर पन्नो पर बिखर जाता है..!

  जब भी लिखती हूँ मै जीत लूँगी इस जीवन को,
 शब्द मेरे विश्राश तुम्हारा होता है,
 मै लिखती नही कोई कविता,
 सिर्फ शब्द मेरे और साथ तुम्हारा होता है...!!!


28 comments:

  1. कविता लिखते तो नहीं बस ख़याल ही कविता बन जाता है ..खूबसूरत अभिव्यक्ति

    ReplyDelete
  2. आपकी इस कविता को बस पढते रहने का मन हो रहा है.बहुत ही खूबसूरत शब्दों से सजाया है मन के भावों को.

    ReplyDelete
  3. किसकी बात करें-आपकी प्रस्‍तुति की या आपकी रचनाओं की। सब ही तो आनन्‍ददायक हैं।

    ReplyDelete
  4. aapka biswas shabdo se jhalak raha hai...aisa hi bana rahe..:)

    ReplyDelete
  5. सुंदर कविता बधाई और शुभकामनाएं |

    ReplyDelete
  6. bhut khubsurat....
    likh rahi kalm meri,
    aur sabd bhi mai dhundh layi
    lekin es ehsash ko ARTH to tumne diya hai..!!!

    ReplyDelete
  7. जब भी लिखती हूँ मै जीत लूँगी इस जीवन को,
    शब्द मेरे विश्राश तुम्हारा होता है,
    मै लिखती नही कोई कविता,
    सिर्फ शब्द मेरे और साथ तुम्हारा होता है...!!

    sunder prem bhavna chipi hai aapki is rachna me . badhai.........

    ReplyDelete
  8. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 29 -03 - 2011
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

    http://charchamanch.blogspot.com/

    ReplyDelete
  9. बहुत खूब.
    दिल को छू गयी आपकी कविता.

    ReplyDelete
  10. sunder ehsas-
    prempoorna astha darshati rachna -
    Ishwar ka sar par haath ho achhe vichar aate hi hain .

    ReplyDelete
  11. सुन्दर भावाभिव्यक्ति.

    ReplyDelete
  12. कविता,खयाल और भावनाओं पर तैरते शब्दों में चाहत के असीम स्पंदन स्वंय को करीने से बयां कर रहे हैं। एक मिश्री घुली कविता।

    ReplyDelete
  13. मै लिखती नही कोई कविता,
    सिर्फ शब्द मेरे और साथ तुम्हारा होता है...!!!

    खूबसुरत प्रस्तुति...

    ReplyDelete
  14. bahut khoob
    nice poem

    visit mine blog also and follow it if you like it
    http://iamhereonlyforu.blogspot.com/

    ReplyDelete
  15. बहुत सुन्दर रचना ! कोमल अहसासों से परिपूर्ण एक बहुत ही कोमल सी प्रस्तुति ! बधाई स्वीकार करें !

    ReplyDelete
  16. मन की कोमल भावनाओं को बड़ी ही खूबसूरती से आपने पन्नों पर उकेरा है !
    आभार एवं शुभकामनाएँ!

    ReplyDelete
  17. सुन्दर रचना .... वाह...

    ReplyDelete
  18. Sushma Ji jo bhi aapne likha hai wo dil ki gahrayee se nikli huyi antahsalila hai jo amrit dhar ki tarah hai...kisi ka saath ya uski yaad ya ehsaas ki khushbu poori tarah ubhar kar aayee hai is kavita mein.Aap bahut accha likhti hain

    ReplyDelete
  19. कल 10/10/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    ReplyDelete
  20. बहुत सुन्दर भावो को संजोया है।

    ReplyDelete
  21. सुषमा जी, टेक्स्ट की लेंग्वेज पढने में असमर्थ हूँ.... पता नहीं क्या मामला है...

    ReplyDelete
  22. बहुत ही सुन्दर विचाराभिव्यक्ति............

    ReplyDelete